बांदा। बुंदेलखंड में एक बार फिर आफत की बारिश हुई। इस बारिश और ओलों ने किसी किसान के अरमान धो दिए तो किसी के सपने चकनाचूर कर दिए। खेतों पर फसलें बिछ गई तो कच्चे घरों के खपरैल भी ओलों के चलते क्षतिग्रस्त हो गए। अभी करीब 10 दिन पहले हुई ओलावृष्टि के जख्म भरे भी नहीं थे कि मंगलवार की शाम को कुदरत का कहर फिर से किसानों पर टूटा।
बेमौसम की बरसात से करीब 70 गांवों की एक हजार बीघा फसलें बारिश व ओलों से बर्बाद हो गई। किसानों का कहना है कि जिम्मेदार नुकसान देखने तो आ रहे हैं, लेकिन कब सरकारी सर्वे होगा, कब और कितना मुुआवजा मिलेगा। इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है। प्रस्तुत है किसानों के नुकसान पर आधारित एक रिपोर्ट-
यमुना पट्टी के 25 से अधिक गांवों में ओले गिरने से गेहूं, सरसों आदि की फसलें खराब हो गईं। एसडीएम ने ओलों से प्रभावित गांवों का जल्द सर्वे कराने की बात कही है।
क्षेत्र ग्राम काजी टोला चौहान, डेरा कबीरपुर, औगासी, जलालपुर, व्योटरा, बदौली, मझीवा, वधैला, समगरा, सिरियाताला, कलाना, करहुली, पिंडारन, भभुवा, अघाव, कलाना, सांडा, इगुवा सहित कई गांवों में ओलों व बारिश से गेहूं, चना, लाही, मसूर, अलसी की फसलें खेतों पर बिछी नजर आ रही हैं। सबसे ज्यादा नुकसान लाही एवं मसूर की फसलों को हुआ है। किसानों के मुताबिक करीब 50 फीसदी फसलों को नुकसान हुआ है। जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल ने ओला प्रभावित गांवों में जाकर फसलों के नुकसान को देखा और अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि जल्द सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा दिलाया जाए।