मुकदमें की सुनवायी के दौरान व पीडि़ता के बयानों के आधार पर ये पाया गया कि घटना के समय नाबालिक थी। आरोपी उसके साथ 3-4 दिन लगातार दुष्कर्म करता रहा। चार्ज बनाते समय मामले में धारा 376-2ढ व पास्को की बढ़ोतरी कर मामले की सुनवायी की गई।
अभियोजन की ओर से 6 गवाह पेश किए गए। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों व अधिवक्ताओं की दलील सुनने के बाद न्यायाधीश ने अपने 38 पृष्ठीय फैसले में बिक्रम को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। कोर्ट ने 10 वर्ष के कारावास का सजा समेत 32000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।