जैन आगम के मुताबिक मोक्ष प्राप्त करने के लिए क्षमा,
मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, अकिंचन और ब्रह्मचर्य आदि 10
व्रतों का होना जरूरी है। तभी व्यक्ति आत्मा से परमात्मा बन सकता है। ये
बातें पंडित अक्षय जैन ने पयूर्षण पर्व के अंतिम दिन प्रवचन में कही।
उन्होंने बताया कि अनंत चतुर्दशी को उत्तम ब्रह्मचर्य का दिन है।
रविवार
को जिन मंदिरों व चैत्यालयों में परिक्रमा व विधि विधान से पूजन किया।
दोपहर में दीप परिक्रमा का मुख्य कार्यक्रम हुआ। इसमें 108 दीप प्रज्ज्वलित
किए और हाथों में लेकर भगवान महावीर की वाणी (मां जिनवाणी) की भक्तिभाव से
परिक्रमा की।
आरती व भजन का कार्यक्रम हुआ। शनिवार की रात
चैत्यालय में फूलना (जैन स्तुति) की गायन प्रतियोगिता हुई। आस्था जैन ने
प्रथम स्थान, अर्चना जैन ने द्वितीय और आभा ने तृतीय स्थान हासिल किया।
संरक्षक महेंद्र कुमार जैन, अध्यक्ष विनय कुमार, प्रकाशचंद्र, रजनीश जैन,
संजय जैन, दिलीप जैन, दिनेश, अरविंद, राजेश, आशीष, सुभाषचंद्र मौजूद रहे।
उधर,
दिगबंर जैन मंदिर छोटी बाजार में सुबह भगवान मुनिसुब्रत का
महामस्तिकाभिषेक हुआ। दस लक्ष्य विधान संपन्न हुआ। नगर पालिका चेयरमैन
विनोद जैन, समिति अध्यक्ष नरेंद्र जैन, प्रकाशचंद्र जैन, सनत कुमार जैन,
पुष्पेंद्र जैन, कैलाश, शैलेंद्र, सुरेश मौजूद रहे।