बांदा। डेंगू का पहला मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद टूट गई है। सर्वे किया तो 10 ऐसे इलाके सामने आए, जो डेंगू मच्छर को लेकर बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। इन इलाकों को रेड जोन में शामिल किया गया है। साथ ही इन इलाकों के घरों में सर्वे कराया जा रहा है, जिससे डेंगू के लार्वा का पता लगाया जा सके। सर्वे के पहले ही दिन तीन घरों में डेंगू का लार्वा भी मिला है, जिन्हें नोटिस जारी किया गया है।
शुक्रवार को स्टेशन रोड की रहने वाली 15 वर्षीय सलोनी में डेंगू की पुष्टि हुई थी। जिले में पहला डेंगू का केस आते ही स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई। उसके बाद शहर में डेंगू के मरीजों और लार्वा की जांच के लिए 24 कर्मचारियों की टीम गठित कर सर्वे कराने की योजना बनाई गई।
शनिवार को ऐसे इलाकों को चिन्हित किया गया, जहां इस प्रकार के खतरनाक मच्छर हो सकते हैं। दस क्षेत्रों को चिन्हित कर लाल घेरे यानि बेहद खतरनाक स्थिति में शामिल किया गया। साथ ही पहले ही दिन स्टेशन रोड पर 50 घरों में सर्वे कराया गया, जिसमें तीन घरों में डेंगू का लार्वा भी मिला है। ये लार्वा बर्तनों व गमलों में भरे पानी में मिला बताया जा रहा है।
-वायरल फीवर के 286 मरीज पहुंचे, 11 की डेंगू जांच
-वायरल फीवर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। शनिवार को 286 ऐसे मरीज पहुंचे, जिन्हें बुखार, सर्दी, जुकाम आदि की समस्या थी। इनमें 11 डेंगू के आशंकित मरीज थे, जिनके रक्त की जांच कराई गई। हालांकि सरकारी पैथोलॉजी रिपोर्ट के अनुसार इनमें किसी में डेंगू की पुष्टि नहीं हुई। इनमें एक जिला कारागार का बंदी चंद्रकुंवर को भी पैरालिसिस और वायरल फीवर के चलते भर्ती किया गया है।
- इस साल छह डेंगू के मरीज मिल चुके हैं मरीज
-जनवरी से अब तक डेंगू के छह मामले सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग में एंटी लार्वा से निपटने के लिए ठोस इंतजाम नहीं किए गए। इस विभाग में डेंगू के लार्वा को नष्ट करने के लिए मात्र तीन कर्मचारी बताए जा रहे हैं।
- इन मोहल्लों में मच्छरों की भरमार
-डीएम काॅलोनी, बंगालीपुरा, कालूकुआं, मर्दननाका, मढिया नाका, क्योटरा (किरन कॉलेज), अर्दली बाजार, खुटला, अलीगंज और गूलरनाका मोहल्ला शामिल है।
- टेमीफॉस से लार्वा किया जाएगा नष्ट
-जल भराव वाले स्थानों पर नालियों में लार्वा, निरोधक दवा टेमीफॉस, बीटीआई का छिड़काव करने का दावा जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार ने किया है। उनका कहना है कि जनपद व सीएचसी, पीएचसी में पर्याप्त मात्रा में लार्वा निरोधक दवा उपलब्ध है। टेमीफॉस 10 लीटर पानी में ढाई एमएल दवा डाली जाती है। इस दवा से लार्वा को नष्ट किया जाएगा।
-मलेरिया विभाग में स्टाफ की कमी
-पांच हजार की आबादी में एक छिड़काव कर्मचारी होना चाहिए, लेकिन विभाग के पास शहर की दो लाख की आबादी के बीच मात्र तीन ही कर्मचारी इस कार्य के लिए मौजूद हैं। इसके अलावा घर-घर सर्वे के लिए भी 12 विभागीय और 12 संविदा पर कार्यरत कर्मचारी हैं, जो कि अभियान के दौरान अपर्याप्त साबित होते हैं।
वर्जन-
फोटो 26 बीएनडीपी11- जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार। संवाद
-डेंगू से निपटने के लिए सर्वे किया जा रहा है। घर-घर जाकर टीम जांच कर रही है और डेंगू का लार्वा मिलने पर कार्रवाई भी की जा रही है। लोगों को जागरूक किया जा रहा है, जिससे वे इस मच्छर से खुद को सुरक्षित कर सकें। तीन को नोटिस जारी किया गया है।
पूजा अहिरवार, जिला मलेरिया अधिकारी