500 व 1000 नोट जमा करने की समय सीमा शुक्रवार को खत्म हो गई। अंतिम दिन जनपद के सभी बैंकों में बमुश्किल डेढ़ से दो लाख रुपये ही जमा हुए। नोटबंदी के 52 दिनों की अवधि में जिले की विभिन्न बैंकों में करीब 1200 करोड़ रुपये से ज्यादा की पुरानी करेंसी जमा हुई।
जबकि निकासी करीब तीन सौ करोड़ की हुई। पुराने नोट जमा करने के अंतिम दिन बैंकों में भीड़ ज्यादा नहीं रही। अलबत्ता, निकासी काउंटर पर लाइनें देखने को मिलीं। नोटबंदी से अभी तक जमा हुए पुराने नोटों में भारतीय स्टेट बैंक अव्वल है। यहां 680 करोड़ के पुराने नोट खजाने में जमा किए गए। इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की 79 शाखाओं में 269 करोड़ और इलाहाबाद बैंक की 26 शाखाओं में 170 करोड़ रुपये जमा हुए। अन्य बैंकों में 20 से 30 करोड़ रुपये ही जमा हो सके।
कैश संकट से नहीं उबरे ग्रामीण बैंक
पुराने नोट जमा होने का सिलसिला थम गया, लेकिन कैश संकट से बैंक उबर नहीं रहे। इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की कई शाखाओं में ‘कैश’ नहीं रहा। रुपये की उम्मीद से आए खाताधारकों को खाली हाथ घर लौटना पड़ा। कुछ शाखाओं पर किसानों ने विरोध भी जताया।
इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक शाखाओं को छोड़कर अन्य बैंकों में भरपूर कैश रहा। आरबीआई के निर्धारित मानकों पर खाताधारकों को 24 हजार रुपये दिए गए। पंजाब नेशनल बैंक, बैंक आफ बड़ौदा, बैंक आफ इंडिया, यूनियन व इलाहाबाद आदि बैंकों में जमा काउंटर में भीड़ कम लेकिन भुगतान खिड़की में लंबी लाइनें लगी रहीं।
इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक शाखाओं में मारामारी की नौबत रही। कालूकुआं शाखा में कैश न होने की जानकारी मिलने पर सुबह से लाइन में बैठे किसान आक्रोशित हो गए। नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने उन्हें समझाकर शांत किया। इसी तरह पल्हरी छावनी, कनवारा आदि शाखाओं में भी कैश नहीं रहा। गांवों में स्थिति बद्तर रही। उधर, छावनी शाखा में तैनात सुरक्षा कर्मी खाताधारकों की पासबुक अपडेट करता रहा।