बांदा। रोजगार की तलाश में महानगरों को पलायन कर गए बुंदेलखंड के मजदूरों को लॉकडाउन में वापस लौटने पर उनके घरों के चूल्हे जलाने को मनरेगा से मजदूरी दी जा रही हैं। पलायन के पूर्व उन्हें जारी किए गए पुराने जॉब कार्डों का नवीनीकरण किया जा रहा हैं। सातों जिलों में अब तक एक लाख 10 हजार जॉब कार्डों का नवीनीकरण का दावा किया गया है।
इसके अलावा 82 हजार 964 प्रवासी मजदूरों को नए जॉब कार्ड जारी किए गए हैं। हरेक जिले में औसतन लगभग 15 हजार जॉबकार्डों का नवीनीकरण किया गया है। सरकारी आंकड़ों में बुंदेलखंड में मनरेगा से 6 लाख 22 हजार 588 मजदूरों को मजदूरी देने की बात कही गई हैं। इनमें 82 हजार से ज्यादा प्रवासी मजदूर बताए गए हैं।
गांवों में मनरेगा के काम न चलने से पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में बुंदेलखंड के मजदूर देश के विभिन्न महानगरों/ राज्यों में पलायन कर गए थे। इनकी संख्या 10 लाख से ज्यादा बताई जा रही हैं। कोरोना महामारी संकट और लॉकडाउन लागू होने के बाद बड़ी संख्या में यह मजदूर वापस आ गए हैं।
गांवों में इन्हें मनरेगा से ही मजदूरी दिए जाने के लिए शासन ने सख्त निर्देश दिए हैं। तमाम गांवों में मनरेगा कार्य शुरू हो गए हैं। ऐसे में ग्राम पंचायतों ने वापस लौटे मजदूरों के लगभग 1 लाख 10 हजार पुराने जॉब कार्ड नवीनीकृत कर दिए हैं।
इनमें बांदा जिले के नवीनीकृत जॉब कार्डों की संख्या लगभग 17 हजार हैं। बुंदेलखंड के अन्य जिलों में भी औसतन 15 हजार कार्डों का नवीनीकरण किया गया है। हालांकि नवीनीकरण के बाद भी तमाम मजदूरों को मजदूरी नहीं मिली है या उन्होंने असमर्थता जताते हुए काम नहीं किया हैं।
सबसे ज्यादा जॉबकार्ड झांसी में जारी हुए
बुंदेलखंड में बड़ी संख्या में पैतृक गांवों को लौट रहे प्रवासी मजदूरों को मनरेगा से मजदूरी देने के लिए उन्हें जॉब कार्ड जारी किए जा रहे हैं। सातों जिलों में अब तक लगभग 83 हजार जॉब कार्ड बनाए जा चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा जॉब कार्ड झांसी जिले में जारी हुए है। चित्रकूटधाम मंडल में सर्वाधिक जॉब कार्ड चित्रकूट में बने हैं।
प्रवासी मजदूरों को जारी मनरेगा जॉब कार्ड
जनपद मनरेगा कार्ड
बांदा 11,896
चित्रकूट 17,518
हमीरपुर 6,780
महोबा 6,958
जालौन 11,780
झांसी 18,532
ललितपुर 10,000
योग 82,964
मनरेगा से हो रहे कई कार्य
प्रवासी मजदूरों के लौटने के बाद बुंदेलखंड में फिर मनरेगा के फावड़े चल पड़े हैं। गांवों में सड़क, मेड़बंदी, तालाब खुदाई आदि के कार्य शुरू किए गए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बुंदेलखंड के सातों जिलों में अब तक 6 लाख 22 हजार 588 मजदूरों को काम दिया जा चुका है। ये मजदूर 4 लाख 10 हजार 527 परिवारों के हैं।
कुल जारी जॉब कार्डों की संख्या 12 लाख 2 हजार 49 है। हालांकि जॉब कार्ड के लिए आवेदन करने वाले मजदूरों की संख्या 12 लाख 45 हजार 375 बताई गई हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बुंदेलखंड में अब तक 4 लाख 24 हजार 566 मजदूरों ने काम के लिए आवेदन किया हैं। इनमें 6 लाख 22 हजार 588 मजदूरों को काम दिए जाने का दावा किया गया है।
कार्यों के साथ मजदूर भी बढ़ाए जा रहे हैं
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के आयुक्त गौरव दयाल का कहना है कि लौटे प्रवासी मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने के लिए हरेक गांव में मनरेगा कार्य चालू कराए गए हैं। शासन का भी इस पर जोर है। मजदूरों को नियमित मजदूरी दिए जाने के भी निर्देेश दिए गए हैं। कार्यों के साथ मजदूरों की संख्या भी बढ़ाई जा रही हैं।
मेहनत बहुत है, नहीं चला पाऊंगा फावड़ा
नरैनी। मोतियारी गांव का राजाराम सोनी सूरत में साड़ी बनाने के कारखाने में ऑपरेटर था। कारखाना बंद होने पर वापस गांव आया है। उसका कहना है कि यहां मनरेगा का फावड़ा चलाने के अलावा कोई काम नहीं है। वह यह कार्य नहीं कर पाएगा। करीब तीस साल से सूरत में मशीन चलाता रहा है। इतनी सख्त मेहनत का काम उसके बस का नहीं।