फोटो-31-बलरामपुर के सीएचसी तुलसीपुर छानबीन करती पुलिस ।-स्रोत : ग्रामीण
जरवा। शेखडीह जरवा गांव निवासी अशफाक (26) की निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए शव को तुलसीपुर थाने के सामने रखकर प्रदर्शन किया। उन्होंने डीएम से अस्पताल की जांच कराकर संचालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रभारी निरीक्षक के समझाने पर परिजन शांत हुए। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
मृतक के भाई जुल्फेकार ने बताया कि मंगलवार देर शाम अशफाक के पेट में अचानक तेज दर्द और बुखार हुआ। परिजन जावेद और छोटे भाई मोहर्रम अली के साथ उसे तुलसीपुर स्थित अवध अस्पताल ले गए। यहां डॉक्टर अब्दुल महबूब खान ने इलाज शुरू किया। करीब तीन दिन इलाज के बाद बृहस्पतिवार सुबह डॉक्टर ने 60 हजार रुपये जमा कराने के बाद अशफाक को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए रेफर कर दिया। परिजन उसे जिला अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टर को फोन कर घटना की जानकारी दी।
जुल्फेकार का आरोप है कि डॉक्टर ने फोन पर कहा कि अब वह क्या कर सकते हैं। घटना की जानकारी पर प्रधान शकील खान समेत ग्रामीण शुक्रवार को तुलसीपुर थाने पहुंचे और प्रदर्शन किया। प्रभारी निरीक्षक सुधीर कुमार ने कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें शांत कराया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
अशफाक की एक-दो वर्षीय पुत्री है। वह हैदराबाद में मजदूरी करता था और करीब आठ माह से घर पर रह रहा था। उसकी मौत से परिवार में मातम है। वहीं, अस्पताल संचालक डॉ. अब्दुल महबूब खान ने आरोपों से इन्कार किया। उन्होंने बताया कि मरीज की मौत की सूचना मिलने के बाद इलाज के लिए ली गई फीस वापस कर दी गई थी।