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Balrampur News: सरयू नहर में गिरा युवक, नहीं मिला सुराग

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बलरामपुर के तिलकहना पुल के पास युवक की तलाश करते गोताखोर ।-संवाद
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श्रीदत्तगंज। ग्राम त्रिलोकपुर स्थित तिलकहना पुल के पास बृहस्पतिवार सुबह एक युवक अचानक सरयू नहर में गिर गया। आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाया, गांव में भी सूचना दी। कुछ देर में स्थानीय गोताखोर नहर में उतरे, लेकिन युवक का कुछ पता नहीं चल सका। ग्रामीणों ने पुलिस को भी सूचना दी। पुलिस ने गोताखोरों से शाम तक तलाश करवाई लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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ग्राम त्रिलोकपुर निवासी महेंद्र गिरि उर्फ छोटन (28) रोज की तरह बृहस्पतिवार सुबह करीब 7:30 बजे गांव के ही पास नहर के किनारे टहल रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अचानक उनका संतुलन बिगड़ा और वह नहर में गिर गए। हालांकि घटना के वास्तविक कारण का पता नहीं लग सका है। महेंद्र को नहर में गिरता देख लोगों ने शोर मचाया। देखते ही देखते घटनास्थल पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। नहर में पानी का बहाव इतना तेज था कि कोई उतरने की हिम्मत नहीं कर सका। लोगों ने कुछ मछुआरों को बुलाया। करीब 8 बजे मछुआरे नहर में उतरे लेकिन आसपास कुछ सुराग नहीं लग सका। तेज बहाव के कारण तलाश मुश्किल हो गई।
ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल गोताखोरों की मदद से खोज अभियान शुरू कराया गया। तेज बहाव और गहराई के चलते राहत एवं बचाव कार्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। शाम तक युवक का कोई सुराग नहीं लग सका। तिलकहना पुल से लेकर मुजहनी फाटक तक नहर किनारे पुलिस और ग्रामीण लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। प्रभारी निरीक्षक अविरल शुक्ल ने बताया कि अभी युवक का पता नहीं चल सका है। गोताखोर प्रयास कर रहे हैं, नहर में आगे भी खोज कराई जा रही है।
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सात वर्ष पहले हो चुकी है पत्नी की मौत
नहर में डूबे युवक के पिता घिराऊ के अनुसार महेंद्र गिरि पेशे से पीओपी कारीगर थे और चेन्नई में रहकर काम करते थे। करीब दो माह पहले ही वह काम से लौटकर घर आए थे। करीब सात वर्ष पहले उनकी पत्नी का निधन हो चुका है। घटना के बाद पिता घिराऊ अपने बेटे की सलामती की उम्मीद में बदहवास होकर इधर-उधर दौड़ते नजर आए और प्रशासन से खोज अभियान तेज कराने की गुहार लगाई। उन्हाेंने बताया कि उनके दो बेटे हैं, महेंद्र छोटे हैं।
मासूम के लिए एकमात्र सहारा थे पिता
सरयू नहर में युवक के लापता होने की घटना ने पूरे गांव को भावुक कर दिया है। महेंद्र गिरि अपने 10 वर्षीय बेटे सचिन के लिए एकमात्र सहारा थे। सचिन ने सात साल पहले अपनी मां को खो दिया था और अब पिता के अचानक लापता होने से उसकी दुनिया एक बार फिर उजड़ती नजर आ रही है। घटनास्थल पर बैठा मासूम बार-बार नहर की ओर टकटकी लगाए अपने पिता के लौट आने की उम्मीद करता दिखा। बेटे को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे ग्रामीण खुद भी भावनाओं पर काबू नहीं रख पा रहे थे।
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