बलरामपुर। सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। जिला महिला अस्पताल सहित पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्स-रे जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। पैथोलॉजी में रिएजेंट (केमिकल) न होने से अधिकांश अस्पतालों में सीबीसी जांच नहीं हो पा रही है। सरकारी अस्पताल केवल टीबी, मलेरिया, शुगर, हीमोग्लोबिन व यूरीन जांच तक ही सीमित हैं।
सरकार की तरफ से कोरोना काल से ही सरकारी अस्पतालों को आधुनिक संसाधनों से लैस करने का दावा भले ही किया जा रहा है लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। जिला महिला अस्पताल सहित श्रीदत्तगंज, नंदनगर, गैसड़ी, गैड़ास बुजुर्ग एवं सादुल्लाहनगर सीएचसी में एक्स-रेेे जांच की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय, जिला मेमोरियल अस्पताल तथा सीएचसी उतरौला, तुलसीपुर, शिवपुरा एवं पचपेड़वा में एक्स-रे मशीन तो है लेकिन प्राय: विद्युत कटौती के चलते मरीजों को बाहर से ही एक्स-रे कराना पड़ता है। कहने को तो जिले के सभी सीएचसी व पीएचसी में पैथोलॉजी जांच की सुविधा उपलब्ध है लेकिन मरीजों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सीएचसी पर सीबीसी मशीन होने के बावजूद रिएजेंट की कमी के चलते मरीजों की सीबीसी (कंपलीट ब्लड काउंट) जांच नहीं हो पा रही है। सीबीसी जांच के लिए मरीजों को निजी पैथोलॉजी पर 300 से लेकर 500 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। अधिकांश सीएचसी और पीएचसी में केवल टीबी, मलेरिया, शुगर, हीमोग्लोबिन व यूरीन जांच ही होती है। पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्स-रे मशीन न होने के कारण हड्डी व सांस से संबंधित मरीजों को जांच के लिए निजी संस्थानों का सहारा लेना पड़ता है।
सीएमओ डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि सरकार की मंशा के अनुरूप सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक्स-रे मशीन उपलब्ध कराने के लिए महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को पत्र लिखा गया है। सीबीसी जांच के लिए रिएजेंट केमिकल की डिमांड भी की गई है। जल्द ही सभी अस्पतालों को एक्स-रे मशीन उपलब्ध हो जाएगी।