बलरामपुर। स्वास्थ्य विभाग के बहुचर्चित अनुरक्षण घोटाले की जांच अब और गहरी हो गई है। जिला अस्पतालों के बाद विजिलेंस ने अब सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में हुए कार्यों की पड़ताल शुरू कर दी है। वर्ष 2015 से 2022 के बीच अनुरक्षण मद में हुए निर्माण, मरम्मत और खरीद कार्यों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया गया है। इस दौरान जिले के नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और 24 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में तैनात रहे करीब 31 चिकित्सा प्रभारियों और अधीक्षकों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है।
सतर्कता अधिष्ठान ने मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से पुराने टेंडरों के आधार पर कराए गए अनुरक्षण कार्यों का पूरा ब्योरा मांगा है। विजिलेंस यह जानना चाहती है कि बिना नए टेंडर जारी किए कितने वित्तीय वर्षों तक पुराने अनुबंधों के आधार पर कार्य कराए गए और भुगतान किया गया। इसके लिए ऑडिट रिपोर्ट, कार्यपूर्ति प्रमाणपत्र, भुगतान से जुड़े अभिलेख, टेंडर प्रक्रिया और अनुबंध संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है।
सूत्रों के अनुसार जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिन भवनों की मरम्मत, रंगाई-पुताई, विद्युत व्यवस्था, जलापूर्ति, फर्नीचर और अन्य अनुरक्षण कार्यों का भुगतान किया गया, वे वास्तव में कराए भी गए थे या केवल कागजों पर कार्य पूर्ण दिखाकर सरकारी धन का भुगतान निकाल लिया गया। इसी की पुष्टि के लिए संबंधित चिकित्सा प्रभारियों और अधीक्षकों द्वारा भेजी गई कार्यपूर्ति आख्या भी तलब की गई है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि भुगतान से पहले कार्यों का भौतिक सत्यापन किस अधिकारी ने किया, किस आधार पर बिलों का भुगतान स्वीकृत हुआ और किन अधिकारियों ने उसकी संस्तुति की। यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर मिला तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। सूत्र बताते हैं कि जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। पहले पूर्व सीएमओ, जिला अस्पतालों के तत्कालीन सीएमएस और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों से जुड़े अभिलेख मांगे गए थे। अब स्वास्थ्य केंद्रों तक जांच पहुंचने के बाद पूरे महकमे में हलचल बढ़ गई है। माना जा रहा है कि दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद कई अधिकारियों से पूछताछ भी हो सकती है।
खूब हुई मनमानी, विजिलेंस खोलेगा राज
वर्ष 2015 से 2022 के बीच जिले के नौ सीएचसी और 24 पीएचसी में तैनात रहे करीब 31 चिकित्सा प्रभारी और अधीक्षक जांच के दायरे में हैं। विजिलेंस यह पता लगाएगी कि अनुरक्षण कार्यों का सत्यापन किसने किया, कार्यपूर्ति प्रमाणपत्र किन परिस्थितियों में जारी हुए और भुगतान की संस्तुति किस आधार पर की गई। टीम वर्ष 2015 से 2022 तक के टेंडर और अनुबंध, अनुरक्षण कार्यों की ऑडिट रिपोर्ट, कार्यपूर्ति प्रमाणपत्र और निरीक्षण आख्या, भुगतान स्वीकृति और बिल-वाउचर, टेंडर कमेटी और संबंधित अधिकारियों का विवरण, कार्य कराने वाली फर्मों का पंजीकरण, जीएसटी, पैन और बैंक विवरण विजिलेंस टीम जुटा रही है। इससे अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की तैयारी है।