जरवा। बाघ जंगल छोड़कर गांवों में क्यों आ जाते हैं?, वन्यजीवों के हमले में मारे गए लोगों के परिवारों को क्या मदद मिलती है? और भगवानपुर जलाशय का मगरमच्छ कितना खतरनाक है? विश्व पर्यटन दिवस पर बसंतलाल स्मारक इंटर कॉलेज, बालापुर-जरवा के छात्रों के ऐसे सवाल चर्चा का विषय बने। क्षेत्र में हाल के दिनों में बाघ, तेंदुए और मगरमच्छ की बढ़ी गतिविधियों के बीच बच्चों ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर खुलकर जिज्ञासा जाहिर की।
विद्यालय के 66 छात्र-छात्राओं का दल एक दिवसीय भ्रमण पर लखनऊ गया। लखनऊ में बच्चों को चिड़ियाघर, राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल, अंबेडकर पार्क और लुलू मॉल का भ्रमण कराया गया। चिड़ियाघर देखने के दौरान छात्रों ने वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, उनके व्यवहार और संरक्षण से जुड़ी जानकारी हासिल की।
छात्रा श्वेता, रविता और विशाल ने पूछा कि मानव और वन्यजीव संघर्ष कैसे रोका जा सकता है। शिक्षकों ने बताया कि वन्यजीवों के जंगल, भोजन और पानी की सुरक्षा सुनिश्चित होने पर वे आबादी की ओर कम आते हैं। अंबिका, अर्सलान, ओम और अमन ने वन्यजीव हमलों में मृतकों के परिजनों को मिलने वाली सरकारी सहायता के बारे में जानकारी ली। वहीं रमेश, तनवीर और राजकमल ने भगवानपुर जलाशय में दिख रहे मगरमच्छ के हमले के तरीके और उसके भविष्य को लेकर सवाल किए। विद्यालय के प्रबंध निदेशक वैभव विवेक ने बताया कि पिछले डेढ़ माह में क्षेत्र में बाघ, तेंदुआ, मगरमच्छ और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ने से बच्चों में जिज्ञासा स्वाभाविक रूप से बढ़ी है। अध्यापिकाओं पूजा, संध्या और आरती ने कहा कि इस संवादात्मक गतिविधि से विद्यार्थियों का ज्ञान बढ़ा और वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी समझ भी मजबूत हुई।