बलरामपुर। निकाय चुनाव में मतदान प्रतिशत को बढ़ाने के लिए काफी प्रयास किए गए। जागरूकता अभियान के साथ ही लोगों को संकल्प दिलाया गया। इसके बाद भी जिले के पांचों निकायों के करीब 73 हजार मतदाताओं ने मतदान से दूरी बनाए रखी। अब इसके कारणों को लेकर मंथन किया जा रहा है।
जिले के पांच निकायों में कुल एक लाख 65 हजार 967 मतदाता हैं। इसमें से 55.63 प्रतिशत यानि 92 हजार 327 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। वहीं, 44.37 प्रतिशत मतदाता यानि 73 हजार 640 मतदाताओं ने वोट ही नहीं डाले। निकायवार बात करें तो बलरामपुर नगर पालिका परिषद में मतदान को लेकर सबसे कम जागरूकता दिखी। यहां पर कुल 72 हजार 319 मतदाता थे। इसमें से मात्र 54.07 प्रतिशत ने ही वोट डाले। यानि 39 हजार 102 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। वहीं, 33216 मतदाताओं ने मतदान ही नहीं किया।
उतरौला नगर पालिका परिषद में कुल 57.34 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले। यहां पर 28 हजार 610 मतदाताओं के सापेक्ष 16 हजार 404 लोगों ने मतदान किया। जबकि 12 हजार 206 लोगों ने वोट ही नहीं डाले। यही स्थिति तुलसीपुर, पचपेड़वा व गैसड़ी नगर पंचायत में रही। हालांकि पहली बार नगर पंचायत बनी गैसड़ी के मतदाताओं में उत्साह रहा।
अब निकायवार मतदान कम होने के कारणों को लेकर अलग-अलग तर्क दिए जा रहे हैं। भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी डीपी सिंह बैस का कहना है कि आम तौर पर ऐसा ही मतदान प्रतिशत पिछली बार भी था। इसके पीछे वजह यह है कि काफी संख्या में मतदाता बाहर रहकर नौकरी कर रहे हैं। इसके कारण इस पर असर पड़ रहा है।
बसपा के जिलाध्यक्ष धर्मपाल गौतम का कहना है कि शहरी क्षेत्र में लोगों में जागरूकता की कमी दिखी। कुछ बूथों से मतदाताओं ने सूची में नाम न होने की भी शिकायत की थी। सपा और कांग्रेस के नेता इस पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।