महराजगंज तराई। नेपाल के खरझार पहाड़ी नाले का जलस्तर बढ़ने से सोमवार शाम रामगढ़ मैटहवा गांव में कुछ देर के लिए बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। रात में पानी उतर गया, लेकिन गांव के संपर्क मार्ग और पंचायत भवन जाने वाले रास्ते पर अब भी जलभराव है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान यह समस्या बार-बार सामने आती है। पानी बढ़ने पर बच्चों का स्कूल जाना और बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार, खरझार नाला हर साल परेशानी का कारण बनता है। जलस्तर बढ़ने पर आसपास का क्षेत्र जलमग्न हो जाता है। पंचायत भवन जाने वाले रास्ते पर एक से दो फीट तक पानी भरने से आवागमन प्रभावित होता है। गांव के प्रशासक तुलाराम यादव ने बताया कि पहली बाढ़ में करीब 20 मीटर तटबंध कट गया था। इसकी जानकारी कई बार अधिकारियों को दी गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ।
अवधेश कुमार ने बताया कि खरझार नाले की बाढ़ से रामगढ़ और मैटहवा सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। जलस्तर बढ़ने पर गांव से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। कई बार घरों तक पानी पहुंचने से खाने-पीने की समस्या भी खड़ी हो जाती है। ग्रामीणों ने नाले की जलनिकासी और तटबंध की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।
स्कूल जाने का रास्ता डूबने से पढ़ाई प्रभावित
कंपोजिट विद्यालय रामगढ़ मैटहवा के शिक्षक वैभव ओझा ने बताया कि बाढ़ का पानी विद्यालय परिसर तक नहीं पहुंचता, लेकिन स्कूल आने-जाने का रास्ता जलमग्न हो जाता है। इससे बच्चों और शिक्षकों को विद्यालय पहुंचने में परेशानी होती है और कई बार शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। ओमप्रकाश ने बताया कि पानी उतरने के बाद भी रास्तों और आसपास जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है। नियाज ने कहा कि किसी के बीमार पड़ने पर उसे अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक अधिकारियों को कई बार समस्या से अवगत कराया गया है।
प्रशासन बोला- रात में ही निकल गया पानी
जिला प्रशासन के अनुसार 31 अगस्त की शाम करीब 5:30 बजे खरझार पहाड़ी नाले का जलस्तर अचानक बढ़ने से रामगढ़ मैटहवा के कुछ हिस्सों में अस्थायी जलभराव हुआ था। क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक ने मौके पर पहुंचकर स्थिति की निगरानी की। प्रशासन के मुताबिक पानी का बहाव जारी रहने से जमा पानी नाले के रास्ते निकल गया और रात में ही जलभराव समाप्त हो गया। आबादी और फसलों को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। हालांकि, ग्रामीणों की शिकायतें संपर्क मार्ग और क्षतिग्रस्त तटबंध की पुरानी समस्या से जुड़ी हैं।
खतरे के निशान से 1.92 मीटर नीचे राप्ती
जिले में राप्ती नदी का जलस्तर फिलहाल सामान्य बताया गया है। एक सितंबर की सुबह आठ बजे नदी का जलस्तर 102.700 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 1.92 मीटर नीचे है। जिले में 3.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने 32 बाढ़ चौकियां और 19 बाढ़ शरणालय तैयार रखे हैं। स्वास्थ्य विभाग की 32 मेडिकल टीमें भी तैनात रखने की व्यवस्था की गई है। राजस्व, सिंचाई, स्वास्थ्य, पशुपालन और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम डॉ. विपिन कुमार जैन ने बताया कि राप्ती नदी के साथ पहाड़ी नालों और तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है।
फोटो-28-बलरामपुर के रामगढ़ मैटहवा गांव में भरा बाढ़ का पानी ।-स्रोत: ग्रामीण
फोटो-28-बलरामपुर के रामगढ़ मैटहवा गांव में भरा बाढ़ का पानी ।-स्रोत: ग्रामीण
फोटो-28-बलरामपुर के रामगढ़ मैटहवा गांव में भरा बाढ़ का पानी ।-स्रोत: ग्रामीण
फोटो-28-बलरामपुर के रामगढ़ मैटहवा गांव में भरा बाढ़ का पानी ।-स्रोत: ग्रामीण