बलरामपुर। संयुक्त जिला अस्पताल के पीकू वार्ड को ही कोरोना की लहर में कोविड वार्ड बना दिया जाता है। वैसे तो इस वार्ड में 21 वेंटिलेटर हैं मगर इनके संचालन के लिए न तो ऑपरेटर हैं और न ही बेहोशी के डॉक्टर। इसके चलते ये वेंटिलेटर आज तक किसी मरीज के काम ही नहीं आ सके। इन हालातों में कोरोना के नए वैरिएंट से निपटने की तैयारियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
संयुक्त जिला अस्पताल में बच्चों के लिए पीकू वार्ड बनाया गया था। कोरोना की लहर में इसी को कोविड वार्ड बना दिया जाता है। इसमें 21 वेंटिलेटर हैं। मगर इनके संचालन के लिए कोई भी विशेषज्ञ व ऑपरेटर नहीं है। ऐसे में इन वेंटिलेटर का अभी तक कोई उपयोग ही नहीं शुरू हुआ है। अस्पताल में 92 ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर हैं, जिन्हें अन्य वार्डों में लगाकर बेहतर प्रबंध का दावा किया जा रहा है।
जिला संयुक्त अस्पताल के सीएमएस डॉ. प्रवीण कुमार कहते हैं कि वेंटिलेटर के न तो ऑपरेटर हैं और न ही बेहोशी के डॉक्टर। ऐसे में स्टाफ नर्स को ही प्रशिक्षित किया गया है। सीएमएस ने बताया कि वेंटिलेटर का अभी तक इस्तेमाल शुरू नहीं हुआ है।
जिले मुख्यालय स्थित स्टोर में 20 नवंबर से कोविड की कोई भी वैक्सीन नहीं है। हालांकि शिवपुरा व तुलसीपुर में 1900 कोवैक्सीन व 50 कोविशील्ड की डोज उपलब्ध हैं। रही बात टीकाकरण की तो 12 से 14 वर्ष आयु वर्ग के 96,154 को कोरोना वैक्सीन की पहली व 92,699 लोगों को दूसरी डोज लगाई जा चुकी है। 15 से 17 आयु वर्ग के 1,65,135 को पहली व 1,56,515 को दूसरी डोज दी गई है।
18 वर्ष से ऊपर के 16,79,854 लोगों को पहली और 16,58,478 लोगों को दूसरी डोज लगाई गई है। 13,74,299 को बूस्टर डोज दी जानी थी मगर 5,16,910 को ही दी जा सकी। जिले में टीकाकरण का काम देख रहे श्यामजी मिश्र का कहना है कि वैक्सीन न होने से टीकाकरण प्रभावित है।
कोरोना को लेकर सतर्कता बढ़ाने को कहा गया है मगर कहीं भी इसका असर नहीं दिख रहा है। स्वास्थ्य कर्मचारी व डॉक्टर ही कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे हैं। शुक्रवार को जिला मेमोरियल अस्पताल में पर्चा काउंटर हो या फिर ओपीडी, दवा वितरण कक्ष या फिर वार्ड। न तो चिकित्सक मास्क लगाए दिखे और न ही शारीरिक दूरी का पालन होता दिखा। बाजार में भी यही हाल दिखा। यहां भी लोग कोविड प्रोटोकॉल को लेकर बेफिक्र दिखे।
सीएमओ डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि कोविड को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। प्रोटोकॉल का निर्धारण किया जा रहा है। दवाओं व संसाधनों की उपलब्धता की समीक्षा की जा रही है। कोरोना जांच बढ़ाने के लिए कहा गया है।