बलरामपुर। जिले के बहुचर्चित स्वास्थ्य घोटाले की जांच अब देवीपाटन मंडल से निकलकर बुंदेलखंड के जिलों तक पहुंच गई है। विजिलेंस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए बांदा, हमीरपुर और महोबा में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े वित्तीय अभिलेखों, खरीद प्रक्रियाओं और सरकारी भुगतानों की पड़ताल तेज कर दी है।
जांच एजेंसी को अभिलेखों की जांच में पता चला है कि घोटाले के मुख्य आरोपी, बहराइच के पयागपुर के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव और उनसे जुड़ी फर्मों को कई जिलों में भुगतान किया गया था। इन्हीं वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने के लिए संबंधित जिलों से रिकॉर्ड जुटाए जा रहे हैं। वर्ष 2014 से 2022 के बीच बलरामपुर में हुए कथित स्वास्थ्य घोटाले में पूर्व विधायक, उनके परिजनों और उनसे संबद्ध फर्मों पर अनियमित तरीके से सरकारी धन प्राप्त करने के आरोप हैं। जांच के दौरान लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं।
इसी क्रम में बांदा के एक व्यवसायी ने विजिलेंस को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि मुकेश श्रीवास्तव और उनके भाई अजय श्रीवास्तव ने उसके नाम का दुरुपयोग कर फर्जी बिल-वाउचर तैयार कराए और प्रभावशाली अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का भुगतान कराया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कई मामलों में बिना वास्तविक आपूर्ति के ही भुगतान जारी कर दिया गया। विजिलेंस ने इस शिकायत को भी जांच का हिस्सा बनाते हुए साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस की टीमें बांदा, हमीरपुर और महोबा में संबंधित फर्मों को हुए भुगतानों, टेंडर प्रक्रिया, आपूर्ति आदेशों, बिल-वाउचर और बैंकिंग लेनदेन का मिलान कर रही हैं। जिला अस्पतालों, मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालयों और अन्य संबंधित कार्यालयों से वर्षों पुराने अभिलेख दोबारा खंगाले जा रहे हैं, ताकि पूरे वित्तीय नेटवर्क की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।
जांच एजेंसी की नजर उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी है, जिन्होंने खरीद प्रक्रिया, भुगतान या फर्मों के चयन में किसी स्तर पर भूमिका निभाई थी। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व में तैनात रहे दो मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ), एक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस), एक जूनियर इंजीनियर (जेई), एक चीफ फार्मासिस्ट, कुछ लिपिकों तथा एक अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ) की भूमिका भी जांच के दायरे में है। उनसे संबंधित अभिलेखों और वित्तीय निर्णयों की गहन पड़ताल की जा रही है।
विजिलेंस पूरे वित्तीय नेटवर्क, आरोपी फर्मों के आपसी संबंधों तथा सरकारी धन के प्रवाह की श्रृंखला को जोड़कर घोटाले की पूरी तस्वीर स्पष्ट करने में जुटी है।