बलरामपुर। कोराना से बचाव के लिए कोविशील्ड लगवा चुके 5,52,265 लोग अब बूस्टर डोज के लिए भटक रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास करीब एक महीने से कोविशील्ड की बूस्टर डोज नहीं है। अस्पताल पहुंचने वालों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। जिले में अब तक लक्ष्य के सापेक्ष महज 38 फीसदी लोगों को ही बूस्टर डोज लगी है।
कोरोना महामारी से बचाव के लिए 12 वर्ष से अधिक उम्र वालों को अभियान चलाकर पहला व दूसरा टीका लगाया गया था। इसमें 13 लाख 74 हजार 295 लोगों को कोविशील्ड व को-वैक्सीन लगी थी। करीब छह माह बाद 15 जुलाई से 30 सितंबर तक 75 दिनों का बूस्टर डोज अभियान चला।
इस दौरान निर्धारित 13 लाख 74 हजार 295 के सापेक्ष पांच लाख 16 हजार 903 लोगों को ही बूस्टर डोज लग पाई। 8,57,392 लोग बूस्टर डोज से वंचित रह गए। अब को-वैक्सीन वाले तीन लाख पांच हजार 127 को तो बूस्टर डोज लग रही है जबकि कोविशील्ड वाले 5,52,265 को वैक्सीन न होने के कारण सुरक्षा कवच नहीं मिल रहा है।
सिविल लाइन निवासी प्रदीप व दीपिका ने बताया कि दो दिन महिला अस्पताल का चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन टीकाकरण नहीं हुआ। गैसड़ी बाजार निवासी सलमान, अफसाना, तुलसीपुर के संदीप तिवारी, छोटका, संतोष व श्रीदत्तगंज के दिनेश ने बताया कि सीएचसी पर कोविशील्ड नहीं लग रही है।
जिले में 12 वर्ष से कम उम्र वाले करीब सात लाख बच्चों को कोरोना महामारी से बचाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। उन्हें अब तक कोई टीका भी नहीं लगा है। इस आयु वर्ग के बच्चों को टीकाकरण का इंतजार है।
जिला स्तर पर उपलब्ध वैक्सीन का आंकड़ा ऑनलाइन दिखता है। उसी के अनुसार वैक्सीन जिले को मिलती है। वहां से कोविशील्ड मिलने पर छूटे हुए लोगों को बूस्टर डोज लगवाई जाएगी। -डॉ. सुशील कुमार, सीएमओ, बलरामपुर