बलरामपुर के सीएचसी श्रीदत्तगंज में जांच कराता मरीज।-संवाद
श्रीदत्तगंज। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र श्रीदत्तगंज इन दिनों अव्यवस्था का केंद्र बन गया है। रोजाना करीब 250 मरीज ओपीडी पहुंचते हैं, लेकिन संसाधन और स्टाफ की कमी से उनको संपूर्ण इलाज नहीं मिल पा रहा है।
सबसे ज्यादा मुश्किल अस्पताल आने वाली गर्भवती महिलाओं को हो रही है। पूरे दो महीने से अल्ट्रासाउंड के लिए क्यूआर कोड नहीं बन रहा है, जिसके चलते गर्भवती महिलाओं को अस्पताल से निराश लौटना पड़ रहा है। मजबूरन उन्हें बाहर निजी सेंटरों पर महंगी जांच करानी पड़ रही है। पूनम, रेशमा व रंजनी आदि महिलाओं ने प्रसव पूर्व जांच न हो पाने की भी शिकायत की।
अस्पताल में डॉक्टरों की भी कमी है। महिलाओं का इलाज आयुष चिकित्सक डॉ. करिश्मा सोनी के भरोसे है, यहां स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। सीएचसी में विशेषज्ञ न होने से गर्भवती महिलाओं का इलाज मुश्किल हो गया है। वहीं, मरीजों का आरोप है कि अस्पताल में आवश्यक दवाएं भी अक्सर उपलब्ध नहीं रहतीं, जिससे उन्हें बाजार से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. आनंद प्रकाश त्रिपाठी और फार्मासिस्ट राम सिंगार तिवारी अस्पताल की संचालन प्रणाली संभाल रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र में फैली अव्यवस्थाओं को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है।
तकनीकी दिक्क्तों से आ रही मुश्किल
तकनीकी कारणों के कारण अक्तूबर से क्यूआर कोड नहीं बन पा रहा है। महिला चिकित्सक की तैनाती के लिए पत्र लिखा गया है।
डॉ. सुमंत सिंह चौहान, प्रभारी चिकित्साधिकारी