सादुल्लाहनगर (बलरामपुर)। स्थानीय सिद्धेश्वरनाथ मंदिर में आयोजित रुद्ध महायज्ञ वर्षगांठ के अवसर पर जारी पांच दिवसीय संगीत कथा के पहले दिन सोमवार की रात भक्तिरस की धारा निरंतर बहती रही।
कथावाचक ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास ने लोकभाषा में रचि श्रीरामचरितमानस के माध्यम से न केवल सामाजिक समरसता, मर्यादा और भक्ति का संदेश दिया, बल्कि रामकथा को जन-जन तक पहुंचाया। उज्जैन, मध्यप्रदेश से पधारी कथावाचिका बाल विदुषी पायल वैष्णव ने बताया कि 16वीं शताब्दी में जन्मे तुलसीदास ने लोकभाषा में रामकथा लिखकर भक्ति आंदोलन को नया आयाम दिया। उनकी रचनाएं धार्मिक ही नहीं, बल्कि समाज सुधार का भी संदेश देती हैं। कथा के दौरान श्री रामचंद्र कृपालु भज मन, हरण भक्त भय दारुणम्...जैसे भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सैकड़ों श्रद्धालु देर रात तक भक्तिरस में सराबोर रहे। इस अवसर पर श्री सिद्धेश्वरनाथ सेवा समिति के अध्यक्ष राधेश्याम गुप्त, राम बहौर वर्मा, राम लौटन गुप्त, दीपचंद जायसवाल, विष्णु प्रताप गुप्त, शैलेन्द्र कौशल, प्रदीप गुप्त, रामकुमार, पंकज कमल, लालता प्रसाद आदि मौजूद रहे।