जरवा। जंगलों में बाघ, तेंदुए समेत अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों की सटीक जानकारी जुटाने के लिए अब आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इसके लिए तुलसीपुर रेंज के जनकपुर वन विश्राम गृह में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) और जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन (जेडएसएल) के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में वन्यजीवों की निगरानी और उनकी गणना के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी गई।
कार्यशाला में भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक डॉ. हरीश गुलेरिया और उनकी टीम ने एम-स्ट्राइप्स तकनीक के उपयोग के बारे में विस्तार से बताया। वनकर्मियों को कैमरा ट्रैप लगाने, इनके माध्यम से वन्यजीवों की गतिविधियों का रिकॉर्ड तैयार करने और सैटेलाइट आधारित निगरानी करने का प्रशिक्षण दिया गया। बाघों की गणना के लिए जंगल में मिलने वाले मल-मूत्र, बाल, जमीन पर खरोंच और पदचिह्नों के आधार पर उनकी मौजूदगी की पहचान करने तथा आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
इस दौरान रामपुर रेंज के क्षेत्रीय वनाधिकारी भोला सिंह, भाभर रेंज के योगेश सिंह, तुलसीपुर और बरहवा रेंज के रेंजर बृजेश परमार तथा उप प्रभागीय वनाधिकारी तुलसीपुर संतोष कुमार वर्मा ने अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ प्रतिभाग किया।
उप प्रभागीय वनाधिकारी संतोष कुमार वर्मा ने बताया कि अन्य रेंजों में भी संवेदनशील स्थानों और आबादी के आसपास कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं।