बलरामपुर। किसी भी कला में मुकाम हासिल करने के लिए प्रतिभा के साथ निरंतर अभ्यास, धैर्य और सही अवसरों की भी जरूरत होती है। शहर के टेढ़ी बाजार की हर्षिता चौहान ने कथक के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए इसी राह को चुना। बड़े भाई डॉ. शुभम चौहान को देखकर उनके मन में संगीत के प्रति रुचि जागी, जो धीरे-धीरे कथक की साधना में बदल गई। संगीत की शिक्षा, नियमित अभ्यास और विभिन्न मंचों पर मिले अवसरों ने उनके सफर को नई दिशा दी। आज वह कथक नृत्यांगना होने के साथ ही प्रशिक्षक के रूप में भी अपनी भूमिका निभा रही हैं।
हर्षिता का सफर केवल मंच पर प्रस्तुतियां देने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने शास्त्रीय नृत्य की विधिवत शिक्षा हासिल करने के लिए निरंतर मेहनत की। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से संगीत में स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद राजस्थान के जयपुर स्थित वनस्थली विद्यापीठ से नृत्य में पीएचडी की पढ़ाई शुरू की। संगीत विषय में यूजीसी नेट उत्तीर्ण करना भी उनकी शैक्षिक उपलब्धियों में शामिल है। पढ़ाई के साथ कथक की बारीकियों को समझना और नियमित अभ्यास जारी रखना उनके लिए इस विधा में आगे बढ़ने का अहम हिस्सा रहा।
प्रतियोगिताओं ने दिया प्रतिभा दिखाने का अवसर
हर्षिता को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों और प्रतियोगिताओं में अवसर मिले, जिन्हें उन्होंने उपलब्धियों में बदला। वर्ष 2019 में प्रयाग संगीत समिति के सांस्कृतिक उत्सव में कथक नृत्य प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया। वर्ष 2022 में युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल की ओर से आयोजित मंडल स्तरीय युवा उत्सव की कथक नृत्य प्रतियोगिता में भी प्रथम स्थान प्राप्त किया।
इसी वर्ष आजादी का अमृत महोत्सव के तहत संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित सांस्कृतिक प्रतिभा खोज कार्यक्रम में कथक प्रस्तुति के लिए उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। 19 जनवरी 2023 को आयोजित सांस्कृतिक उत्सव में भी उन्होंने कथक नृत्य में प्रथम स्थान हासिल किया।
पंडित बिरजू महाराज कथक संस्थान की ओर से नामित कलाकार के रूप में उन्हें प्रदेश के कई जिलों में आयोजित कथक कार्यशालाओं में नृत्य प्रशिक्षक के तौर पर काम करने का अवसर मिला। इस भूमिका ने उन्हें अपनी कला का प्रदर्शन करने के साथ ही विद्यार्थियों और नवोदित कलाकारों तक कथक की बारीकियां पहुंचाने का मौका भी दिया।
प्रशिक्षण से नई पीढ़ी तक पहुंचा रहीं कथक
हर्षिता का मानना है कि कथक केवल पैरों की थिरकन और घुंघरुओं की आवाज तक सीमित नहीं है। भाव, साहित्य, लय और ताल इसके अभिन्न अंग हैं। किसी कलाकार की प्रस्तुति तभी प्रभावशाली बनती है, जब वह नृत्य की तकनीक के साथ भावों और साहित्य के अर्थ को भी समझता है।
जून 2026 में एमएलके पीजी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में भी उन्होंने विद्यार्थियों को कथक में भाव और साहित्य की भूमिका से परिचित कराया था। उनके लिए कथक केवल एक नृत्य शैली नहीं, बल्कि भावों और साहित्य के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति को साकार करने की कला है। इसी सोच के साथ वह अपनी साधना जारी रखते हुए नई पीढ़ी को कथक की बारीकियों से परिचित करा रही हैं।
फोटो-18-हर्षिता चौहान