पिंजरा बदलने के बाद भी पकड़ में नहीं आ रहा बाघ
जरवा। सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग की तुलसीपुर रेंज के हलौरा संग्रामपुर और आसपास के गांवों में बीते एक माह से बाघ की हलचल से ग्रामीणों में दहशत है। वन विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया था, जिसे दूसरी जगह भी शिफ्ट किया गया। बाघ अब तक पिंजरे में नहीं आया। ग्रामीणों का कहना है कि जहां पिंजरा लगाया जाता है, वहां बाघ नहीं पहुंचता, जबकि दूसरे स्थानों पर उसकी मौजूदगी के निशान और आवाजें मिलती हैं।
हलौरा निवासी रफीक लाला ने बताया कि बुधवार रात बारिश की संभावना के चलते पिंजरे में बकरी नहीं बांधी गई। मौसम ठीक होने पर बकरी बांधकर फिर पिंजरा लगाया जाएगा। प्रेमपुर निवासी अलीम और सलीम को खेत के पास गन्ने में गाय की हड्डियां मिलीं। ग्रामीणों ने बाल और पूछ देखकर इसे बाघ का शिकार बताया। मंगलवार रात आफत अली की गाय राप्ती नहर के पास से गायब हो गई। मौके पर बाघ और गाय के पंजों के निशान मिले। बुधवार रात पुरैना निवासी चिराग अली की गाय भी घर के बाहर से गायब हो गई।
बुधवार दोपहर माता मंदिर के पास पानी लेने गए 15 वर्षीय शमशेर के सामने अचानक बाघ आ गया। डर के मारे वह चिल्लाकर बेहोश हो गया। बाघ बिना हमला किए वहां से भाग गया। रेंजर अमरजीत प्रसाद ने बताया कि वन दरोगा अखिलेश गुप्ता समेत टीम को मौके पर भेजा गया है। ग्रामीणों को बच्चों को अकेले बाहर न भेजने और पशुओं को सुरक्षित स्थान पर बांधने की सलाह दी जा रही है।