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तालाबों व नालों पर अतिक्रमण से बढ़ी बाढ़ की विभीषिका

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बलरामपुर। दशकों बाद एक बार फिर शहरवासियों को बाढ़ का सामना करना पड़ा। इस बार की बाढ़ में स्थानीय प्रशासन और भूमाफियाओं के गठजोड़ के चलते भी हालात बिगड़े हैं। शहर से जलनिकासी के लगभग सभी स्थानों पर अतिक्रमण कर धड़ल्ले से प्लाटिंग की जा रही है। ऐसे में शहर में भरे पानी का बहाव कम होने से भी बाढ़ के हालात बिगड़ गए हैं। किसी का मकान तो किसी की गृहस्थी का सामान बाढ़ में बह गया। बाढ़ की तबाही ने लोगों को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया है।
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शहर की झारखंडी रेलवे क्रॉसिंग से वीर विनय चौराहा होकर गुजरने वाला नाला हो या सुआंव नाला सभी पर अतिक्रमण है। इसके चलते नालों की सफाई नहीं हो पाती है। प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से अतिक्रमणकारियों को चेतावनी तो दी जाती है लेकिन उस पर अमल कभी नहीं होता। इसके अलावा शहर के लगभग सभी तालाब अतिक्रमण की चपेट में हैं। सुआंव नाले के दोनों तरफ पक्का निर्माण कर लिया गया है। इससे नाला काफी संकरा हो गया है। इस बार नाले में आए पानी के तेज बहाव की समुचित निकासी नहीं हो सकी। जिसका खामियाजा सिविल लाइंस, अचलापुर व अन्य मोहल्ले के लोगों को भुगतना पड़ा।
आज से करीब 10 साल पहले तक बाढ़ आने पर नाला चौड़ा हो जाता था और पानी आसानी से निकल जाता था। सुआंव नाले का पानी मोहल्लों में कभी नहीं भरता था। इसी तरह बीते एक दशक में शहर के आसपास प्लाटिंग का धंधा तेजी से फला-फूला। लोगों ने कमाई के चक्कर में ये देखना मुनासिब नहीं समझा कि पानी कहां-कहां से निकलता है और बाढ़ आने पर इसका क्या खामियाजा भुगतना पड़ेगा। प्रापर्टी डीलरों ने मुुंहमांगी रकम लेकर लोगों को जमीनें बेच डालीं। इन जमीनों पर मकान तो बन गए मगर अब बाढ़ आई तो ये इलाके पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं।
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अतिक्रमण के कारण कई नालों की तो सफाई कराना ही नामुमकिन है। ऐसे में आने वाले दिनों में भी शहरवासियों को बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है। नालों, तालाबों व अन्य स्थानों पर अतिक्रमण हटवाने के सुप्रीम कोर्ट तक के आदेश हैं लेकिन जिला प्रशासन इस पर अमल ही नहीं कराता है। आज इसी का नतीजा है कि शहर में जहां देखों वहां पानी ही पानी नजर आ रहा है।
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