बलरामपुर। अब जब निकाय चुनाव का मतदान हो चुका है तो सभी की निगाहें 13 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी हुई हैं। ऐसे में निकाय चुनाव के नतीजे इस बार मिशन 2024 की जमीन तय करेंगे। दरअसल, सभी प्रमुख दलों ने इस चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ा है।
बलरामपुर जिले में कुल चार विधानसभा सीटें हैं। इसमें से उतरौला गोंडा संसदीय सीट में आती है, जबकि बलरामपुर सदर, तुलसीपुर व गैसड़ी श्रावस्ती सीट में अपनी हिस्सेदारी निभा रही है। वर्ष 2019 के संसदीय चुनाव में श्रावस्ती सीट से बसपा के राम शिरोमणि वर्मा ने भाजपा के दद्दन मिश्र को हराकर जीत हासिल की थी।
अब जब मिशन 2024 की तैयारी चल रही है तो सभी दल अपनी-अपनी रणनीति तैयार करने में लगे हुए हैं। ऐसे में निकाय चुनाव का परिणाम इसमें नेताओं का कद तय करने में अहम किरदार निभाएगा। अगर वर्ष 2017 के निकाय चुनावों के परिणाम पर नजर डालें तो जिले के चार निकायों में से एक सीट सपा, एक बसपा व दो निर्दलीयों के खाते में गई थी। भाजपा व कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला था। इस बार पांच निकायों में चुनाव हुआ है।
यह तो 13 मई को पता चलेगा कि इस बार किसके खाते में कितनी सीटें गई हैं लेकिन, दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। बसपा से सांसद राम शिरोमणि वर्मा की साख दांव पर है, वहीं सपा से पूर्व मंत्री डॉ. एसपी यादव की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। भाजपा में पूर्व सांसद दद्दन मिश्र, जिला पंचायत अध्यक्ष आरती तिवारी, विधायक पल्टूराम, कैलाशनाथ शुक्ल, रामप्रताप वर्मा व पूर्व विधायक शैलेश कुमार सिंह शैलू की लोकप्रियता भी यह चुनाव तय करेगा। राजनीति के जानकारों की मानें तो यह चुनाव लोकसभा चुनाव से पहले का रिहर्सल है।