बलरामपुर। सदर विकासखंड के कोयलरा गोपालपुर गांव में मां पाटेश्वरी राज्य विश्वविद्यालय के निर्माण की राह आसान हो गई है। गोंडा में विश्वविद्यालय स्थापना की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका डीएम अरविंद सिंह की प्रभावी से खारिज हो गई है। एक अन्य याचिका हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में विचाराधीन है। इसे भी निरस्त कराने के लिए पैरवी की जा रही है।
डीएम ने बताया कि एक अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मांग की थी कि बलरामपुर में बन रहे राज्य विश्वविद्यालय को निरस्त कर मंडल मुख्यालय के गोंडा जनपद में बनवाया जाए। याचिका को खारिज करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद में वाद योजित कर अपनी पैरवी करें, जिसके क्रम में विपक्षियों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। कानून विशेषज्ञों व मजिस्ट्रेटों की राय लेकर उच्च न्यायालय में डीएम प्रभावी पैरवी कर रहे हैं। डीएम की तरफ से न्यायालय में यह रिपोर्ट दी गई कि राज्य विश्वविद्यालय के बलरामपुर के प्रस्तावित निर्माण स्थल से गोंडा जनपद की सीमा पांच किलोमीटर व श्रावस्ती की सीमा 14 किलोमीटर है। ये स्थान देवीपाटन मंडल के तीन जनपदों के मध्य में है। याचिकाकर्ता ने सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए याचिका दायर की है जो निरस्त किए जाने योग्य है।
डीएम ने हाईकोर्ट अपना पक्ष रखते हुए कहा कि दिसंबर 2023 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में एक कानून पारित किया गया था कि कार्यकारी सार्वजनिक नीति न्याय पालिका का क्षेत्र नहीं है, जब तक कि नीति संविधान के किसी प्रावधान के दायरे से बाहर न हो। भारत संघ की सार्वजनिक नीति के अनुसार बलरामपुर एक आकांक्षी जिला है और रजिस्ट्रार की नियुक्ति के बाद राज्य विश्वविद्यालय अब एक पूर्ण उपलब्धि है।