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Balrampur News: युवाओं को थारू सभ्यता की झलक दिखाएगा संग्रहालय

Sun, 11 Jun 2023 11:24 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
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बलरामपुर के इमिलिया कोडर में बना थारू संग्राहलय
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बलरामपुर। थारू जनजाति की संस्कृति को सहेजने के लिए भारत-नेपाल सीमा पर पचपेड़वा ब्लॉक के इमिलिया कोडर में सांस्कृतिक संग्रहालय बनकर तैयार हो गया है। करीब 30 करोड़ की लागत से पांच एकड़ में बने इस संग्रहालय में थारूओं की वेश-भूषा, वाद्य यंत्र, कलाकृतियां, प्राचीन उपकरण व औजारों को संग्रहित किया जाएगा। जल्द ही बलरामपुर सहित अन्य शहरों के लोग इसका भ्रमण कर थारू जनजाति की संस्कृति व परंपरा से रूबरू हो सकेंगे।
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पचपेड़वा व गैंसड़ी ब्लॉक के 54 गांवों में थारू जनजाति के लोग निवास करते हैं। इन गांवों में थारुओं की आबादी करीब 35 हजार है। इनकी अनूठी परंपरा सभी को अपनी ओर आकर्षित करती है। इसमें लोकगीत, समूह नृत्य व पारंपरिक वाद्य यंत्रों का खास महत्व है। यहां थारू जनजाति के लोग अपने आप को महाराणा प्रताप का वंशज मानते हैं। इनकी वेश-भूषा भी मेवाड़ के लोगों से मिलती जुलती है। उनकी खास संस्कृति के चलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का थारू समाज के लोगों से खासा लगाव है।
पर्यटकों के लिए होगा आकर्षण का केंद्र
आधुनिकता की चकाचौंध में नई पीढ़ी अपनी संस्कृति को न भूले इसके लिए पंडित दीनदयाल शाेध संस्थान का प्रयास रंग ला रहा है। वर्ष 1988 में पंडित दीनदयाल शोध संस्थान की स्थापना भारत रत्न नानाजी देशमुख ने इमिलिया कोड़र में कराई थी। यहां थारू युवाओं को उच्च शिक्षा देने के लिए वर्ष 2017 में इग्नू अध्ययन केंद्र की स्थापना की गई। यहां से उच्च शिक्षा प्राप्त कर थारू युवा रोजगार से जुड़ रहे हैं। पंडित दीनदयाल शोध संस्थान ने थारू संस्कृति को सहेजने के लिए सरकार को पांच एकड़ जमीन संग्रहालय का निर्माण कराने के लिए दान में दी थी। इसी जमीन पर 30 करोड़ रुपये से राज्य स्तरीय संग्रहालय का निर्माण कराया गया है। संग्रहालय का संचालन शुरू होने से यह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनकर उभरेगा और इस पिछड़े क्षेत्र के विकास को रफ्तार मिलेगी।
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जल्द होगा लोकार्पण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ थारू जनजाति के विकास को लेकर लगातार प्रयास रह रहे हैं। इमिलिया कोडर में यह संग्रहालय उनके विशेष पहल पर बनकर तैयार है। जल्द ही मुख्यमंत्री संग्रहालय का लोकार्पण करेंगे। लोकार्पण के बाद पर्यटकों के लिए संग्रहालय खोल दिया जाएगा।
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- रामकृपाल शुक्ल, कार्यक्रम समन्वयक थारू जनजाति
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