पचपेड़वा के इमिलिया कोडर में आयोजित मैत्री महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करतीं युव
गैसड़ी। भारत-नेपाल सीमा से सटे थारू बहुल क्षेत्र के इमलिया कोडर में मैत्री महोत्सव का आयोजन हुआ। जनजातीय सांस्कृतिक संग्रहालय परिसर में पर्यटन विभाग और संग्रहालय की ओर से हुए महोत्सव में कार्यक्रमों की धूम रही। इस अवसर पर भारत और नेपाल के सैकड़ों लोगों ने सहभागिता कर दोनों देशों की सांझी विरासत और ‘रोटी-बेटी’ के अटूट रिश्ते को संदेश दिया।
शनिवार को महोत्सव की शुरुआत सांस्कृतिक शोभायात्रा से हुई। कार्यक्रम में एक जनपद एक उत्पाद प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें स्थानीय हस्तशिल्प और उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। भारत-नेपाल के सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित चित्रकला, रंगोली और विषयगत प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। महोत्सव में स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं और युवा कलाकारों की सक्रिय भागीदारी रही। इससे युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी संस्कृति पर गर्व करने का अवसर मिला। दीनदयाल शोध संस्थान से संचालित महाराणा प्रताप जनजातीय ग्रामोदय विद्यालय के प्रधानाचार्य आशुतोष शुक्ला, रामशरन गुप्ता, रामकृपाल शुक्ला, श्याम मनोहर तिवारी सहित सशस्त्र सीमा बल और पुलिस जवानों के साथ भारत-नेपाल के नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पद्मश्री उर्मिला की प्रस्तुति रही आकर्षक का केंद्र
महोत्सव में दोनों देशों के कलाकारों ने लोकगीत, नृत्य और संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव की प्रस्तुति आकर्षक रही। मिर्जापुर से आईं उर्मिला श्रीवास्तव की लोकगायन प्रस्तुति से भारतीय लोकसंस्कृति की गहराई और भावनात्मक जुड़ाव स्पष्ट झलक रहा था। जिले के पारिजात त्रिपाठी ने पारंपरिक लोकधुनों से कार्यक्रम की शुरुआत कर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। लखनऊ से आए आचार्य ऋषि राज पांडेय और प्रिय शुक्ला ने लोकगीत प्रस्तुत किया। बाराबंकी की सरोज श्रीवास्तव, प्रयागराज की स्वाती निरखी तथा बलरामपुर के संजय गिरी और सुनीता जायसवाल ने भी अपने मधुर स्वरों से कार्यक्रम को ऊंचाई दी। नेपाल की बुसरा फातिमा ने लोकनृत्य के माध्यम से सांस्कृतिक विविधता का रंग बिखेरा। जिले की तारा चौधरी ने थारू लोकनृत्य प्रस्तुत किया। महोबा के उमाशंकर सेन ने आल्हा गायन से उत्साह भर दिया। गोंडा की लोकगायिका शेफाली पांडेय ने फागुन के रंगों से सजा गीत प्रस्तुत किया।