हाईकोर्ट के निर्देश और शासन से अभियोजन की स्वीकृति मिलने के बाद पुलिस ने दरोगा पवन कनौजिया के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की है। शुक्रवार को मामला स्थानीय अदालत में पेश हुआ। अदालत ने विवेचना से जुड़े अभिलेखों को रिकॉर्ड पर लेते हुए अगली तारीख तय की। पुलिस सूत्रों के अनुसार मामले में सभी साक्ष्य और बयान कोर्ट में पेश कर दिए गए हैं।
राम बुझारत की पत्नी कुसुमा देवी ने कहा कि हम दो साल से दर-दर ठोकर खा रहे थे। अब अदालत में सुनवाई शुरू हुई है, तो लग रहा है कि पति को न्याय मिलेगा। शुरू में पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, लेकिन अदालत और शासन के हस्तक्षेप के बाद मामला आगे बढ़ सका।
गैड़ास बुजुर्ग गांव के बुजुर्ग रामसूरत यादव ने कहा कि राम बुझारत गरीब थे। उनके साथ नाइंसाफी हुई। अब चार्जशीट और कोर्ट में सुनवाई से ग्रामीणों को लग रहा है कि प्रशासन अब सच में सुन रहा है।
जांच में दोषी पाया गया था दरोगा
मामले की जांच में दरोगा पवन कनौजिया की भूमिका को गंभीर माना गया था। डीएम अरविंद सिंह की मजिस्ट्रेटी जांच और बाद में गठित एसआईटी रिपोर्ट दोनों में यह निष्कर्ष सामने आया था कि दरोगा की संलिप्तता से ही जमीन विवाद ने विकराल रूप लिया। राम बुझारत ने आत्मदाह जैसा कदम उठाया।
लंबे समय तक अभियोजन स्वीकृति न मिलने से कार्रवाई अटकी रही थी। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद शासन ने 24 अक्तूबर को दरोगा पर मुकदमा चलाने की अनुमति दी। इसके बाद मामला आगे बढ़ा।
घटना की पृष्ठभूमि
23 अक्तूबर 2023 को गैड़ास बुजुर्ग थाने के सामने जमीन विवाद और पुलिस उत्पीड़न से आहत होकर राम बुझारत ने आत्मदाह कर लिया था। इलाज के दौरान 27 अक्तूबर को उनकी मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे प्रदेश में बलरामपुर को चर्चा में ला दिया।