बलरामपुर। न दबाया और न ही बरगलाया। कुछ भी नहीं छिपाया। सख्त कार्रवाई की। कानून का इकबाल बुलंद किया। यह नई पुलिसिंग का बदमाशों के प्रति सख्ती का नया नजरिया है। किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म के बाद सहमे परिवार के साथ पुलिस जिस तरह खड़ी रही वह बताता है कि संकल्प, सरोकार और कार्रवाई का संस्कार आत्मसात कर लिया जाय तो अपराधियों की कमर तोड़नी मुश्किल नहीं है। बलरामपुर पुलिस ने कुछ ऐसा ही किया। आज बिटिया के गुनहगार अख्तर रजा, राज कुरैशी, फिरोज कुरैशी व शिवा यादव सलाखों के पीछे हैं।
कहानी लोकलाज और अपराधियों के भय से शुरू होती है। 12 जून की रात मेले से लौटते समय सामूहिक दुष्कर्म की शिकार किशोरी के साथ चचेरा भाई भी था। परिजनों को जब दूसरे दिन घटना की जानकारी हुई तो सभी ने चुप्पी साध ली। कारण, बेटी की बदनामी और मामला चश्मदीद के जीवन से जुड़ा था।
चचेरा भाई ही पूरी घटना का गवाह था। इससे घर के लोग डर गए कि कहीं आपराधिक पृष्ठभूमि के चोरों आरोपी खुद को बचाने के लिए उसे ही न मार दें। इसी बीच मामले की जानकारी बीट पुलिसकर्मियों को हुई तो उन्होंने प्रभारी निरीक्षक अवधेश राज सिंह को जानकारी दी।
उन्होंने पहले अपने स्तर से घटना की पड़ताल की। घटना की पुष्टि होने पर प्रभारी निरीक्षक ने परिजनों से संपर्क साधा। पीड़िता की मां से बात की। मां को समझाया कि ऐसी घटना पर कार्रवाई न हुई तो बदमाशों का मनोबल बढ़ेगा। सुरक्षा का भरोसा दिया। एसपी से भी बात कराई। एसपी ने भी भरोसा दिया कि आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस का संबल मिला तो मां ने हिम्मत जुटाई और बुधवार को तहरीर दी। पुलिस ने भी भरोसे को कायम रखा। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया। एसपी ने एएसपी विशाल पांडेय, सीओ राघवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी दी कि सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो।
आखिरकार पीड़ित परिवार को इंसाफ मिला और बृहस्पतिवार सुबह तक सभी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ गए। चारों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया।