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Balrampur News: बारिश में दलदल बना बाईपास, जोखिम में जान

Sat, 12 Sep 2026 11:37 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
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फोटो-3-बलरामपुर के मथुरा से बहादुरगंज के बीच बन रहे पुलिया के बाईपास में हुए जलभराव के बीच से ह
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ललिया। मथुरा-चौधरीडीह मार्ग पर निर्माणाधीन तीन पुलों के कारण बनाया गया बाईपास बारिश में लोगों के लिए राहत के बजाय जोखिम बन गया है। बारिश होते ही वैकल्पिक मार्ग पर पानी भर जाता है और पानी उतरने के बाद सड़क कीचड़ में बदल जाती है। कई जगह बाईपास धंस भी गया है। इससे दोपहिया वाहन चालकों को फिसलने का डर बना रहता है, जबकि भारी वाहनों के पहिए कीचड़ में धंसने से यातायात प्रभावित हो रहा है।
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समस्या केवल खराब सड़क तक सीमित नहीं है। निर्माण स्थल के आसपास कई जगह सुरक्षा घेरा और बैरीकेडिंग अधूरी है। पर्याप्त चेतावनी संकेत नहीं होने से रात में हादसे का खतरा और बढ़ जाता है। निर्माण सामग्री, खुले हिस्सों और सड़क पर बने गड्ढों के बीच वाहन चालकों को सावधानी से रास्ता तय करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि करोड़ों रुपये की सड़क परियोजना के दौरान जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।



पुल निर्माण के दौरान मुख्य मार्ग पर यातायात प्रभावित न हो, इसलिए वाहनों को बाईपास से निकाला जा रहा है। लेकिन बारिश ने अस्थायी मार्ग की तैयारियों की पोल खोल दी है। जगह-जगह जलभराव और वाहनों के लगातार आवागमन से सड़क की मिट्टी दलदल जैसी हो गई है।
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स्कूल, बाजार और अस्पताल जाने वालों की रोज परीक्षा



मथुरा, चौधरीडीह, ललिया और आसपास के गांवों के लोगों के लिए यह मार्ग रोजमर्रा की जरूरत का प्रमुख संपर्क मार्ग है। इसी रास्ते से ग्रामीण बाजार, स्कूल, अस्पताल, तहसील और अन्य जरूरी कामों के लिए आते-जाते हैं। खराब रास्ते का सबसे अधिक असर दोपहिया वाहन चालकों पर पड़ रहा है।



क्षेत्र के मो. अली, मनीष कुमार, रोहित श्रीवास्तव, सूरज और मनोज ने बताया कि बारिश के बाद बाईपास से निकलना मुश्किल हो जाता है। पानी और कीचड़ के कारण वाहन संभालना कठिन होता है। उनका कहना है कि अभी कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है, लेकिन खतरा लगातार बना हुआ है। निर्माण स्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम पहले से होने चाहिए।



46 करोड़ की परियोजना, फिर अस्थायी रास्ता बदहाल क्यों?



कोड़री-मथुरा से चौधरीडीह मार्ग के करीब 16 किलोमीटर हिस्से के लिए 46 करोड़ 11 लाख 51 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। पहली किस्त के रूप में 5 करोड़ 81 लाख 94 हजार रुपये जारी हो चुके हैं। सड़क की मरम्मत और चौड़ीकरण से क्षेत्र के लोगों को बेहतर आवागमन की उम्मीद है। काम पूरा होने के बाद रोडवेज बस सेवा शुरू करने की योजना भी सामने आई थी।



जनवरी 2026 में सड़क की कम चौड़ाई के कारण बस संचालन में परेशानी और काम पूरा होने के बाद बस चलाने की बात कही गई थी। इस मार्ग से एक लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई थी। ऐसे में सवाल है कि स्थायी सड़क के सुधार पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं तो निर्माण अवधि में बनाए गए अस्थायी रास्ते को सुरक्षित रखने की व्यवस्था क्यों नहीं हो पा रही है।



दिन में वाहन चालक गड्ढों और निर्माण स्थल को देखकर निकल जाते हैं, लेकिन रात में खतरा बढ़ जाता है। पर्याप्त बैरीकेडिंग, चेतावनी संकेत और प्रकाश व्यवस्था नहीं होने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।



जल्द समाधान का दावा



लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता आलोक कुमार दुबे ने बताया कि मौके का निरीक्षण कर समस्या का जल्द समाधान कराया जाएगा। एक्सईएन पीडब्ल्यूडी कुमार शैलेंद्र ने बताया कि निर्माणाधीन पुलों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था की जांच कराकर आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित किए जाएंगे। जलभराव की समस्या भी दूर कराई जाएगी।
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