बलरामपुर। नागपुर निवासी ईदुल इस्लाम और उतरौला क्षेत्र के जमालुद्दीन उर्फ छांगुर की आपसी गठजोड़ ने नेपाल सीमा से सटे इलाकों में अवैध धर्मांतरण की मजबूत जमीन तैयार कर ली थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क को योजनाबद्ध तरीके से फैलाने के लिए ईदुल इस्लाम ने छांगुर को ''''भारत प्रतीकार्थ सेवा संघ'''' में ओहदा सौंपा, जिससे उसे संगठनात्मक पहचान और वैचारिक मजबूती मिल सके।
एटीएस सूत्रों के अनुसार नागपुर स्थित ''''भारत प्रतीकार्थ सेवा संघ'''' संस्था के माध्यम से ईदुल इस्लाम ने छांगुर को अवध प्रांत की जिम्मेदारी दी थी। इसी ओहदे की आड़ में छांगुर ने बलरामपुर, श्रावस्ती के साथ ही सिद्धार्थनगर, कुशीनगर और नेपाल सीमा से जुड़े संवेदनशील इलाकों में अपना नेटवर्क खड़ा किया। सीमावर्ती क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति, गरीबी और सीमापार आवाजाही की सहजता का लाभ उठाकर दोनों ने धर्मांतरण को विस्तार देना शुरू किया।
एटीएस की जांच में पहले ही यह सामने आया है कि ईदुल इस्लाम केवल वैचारिक मार्गदर्शक नहीं था, बल्कि उसने फंडिंग, संपर्क और लॉजिस्टिक सपोर्ट के जरिए इस मुहिम को गति दी। नेपाल सीमा के नजदीक गांवों में ठिकाने, सभाएं और संपर्क सूत्र उसी रणनीति का हिस्सा थे। छांगुर इन गतिविधियों का स्थानीय चेहरा था, जबकि पीछे से पूरी रूपरेखा ईदुल इस्लाम के स्तर पर तय की जा रही थी।
पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटी एटीएस
ईदुल इस्लाम की गिरफ्तारी के बाद एटीएस एक बार फिर इस पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुट गई है। सूत्रों के मुताबिक, पहले चरण की जांच में जो कड़ियां अधूरी रह गई थीं, उन्हें अब जोड़ने की तैयारी है। खासकर नेपाल सीमा से जुड़े संपर्क, विदेशी फंडिंग और अन्य राज्यों में फैले सहयोगियों पर फोकस बढ़ाया गया है। ईदुल इस्लाम के एटीएस की गिरफ्त में आने के बाद छांगुर के करीबी एक बार फिर सहमे हुए हैं।
माना जा रहा है कि पूछताछ में कई नए नाम और ठिकाने सामने आ सकते हैं। एटीएस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी पूरे अवैध धर्मांतरण सिंडिकेट को उजागर करने की दिशा में अहम साबित होगी और आने वाले दिनों में कार्रवाई और तेज हो सकती है।