बलरामपुर। साइबर अपराधी अब लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों और सोशल मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता की आड़ में लोगों का बैंक खाता खंगाल रहे हैं। कोई डॉक्टर का नंबर बताने के बहाने ओटीपी हासिल कर रहा है तो कोई यूट्यूब पर सब्सक्राइबर बढ़ाने का झांसा देकर लोगों की मेहनत की कमाई हड़प रहा है।
ऐसे ही दो मामलों में रेहरा बाजार पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क ने पीड़ितों को बड़ी राहत दी है। पुलिस ने दोनों मामलों में कार्रवाई कर कुल 39,270 रुपये की धनराशि पीड़ितों के खाते में वापस कराई है। पहला मामला गाजीपुर निवासी विवेक सिंह से जुड़ा है, जो वर्तमान में बीपीएस इंटर कॉलेज में शिक्षक हैं।
उन्होंने बताया कि 10 सितंबर 2025 को डॉक्टर का नंबर खोजने के दौरान उनकी बातचीत एक साइबर ठग से हो गई। ठग ने खुद को मददगार बताकर ओटीपी मांगा। जैसे ही उन्होंने ओटीपी साझा किया, उनके खाते से 29,272 रुपये निकल गए। ठगी का एहसास होने पर उन्होंने तत्काल नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
प्रभारी निरीक्षक दुर्गेश सिंह ने बताया कि शिकायत पर तकनीकी जांच के जरिए धनराशि का पता लगाया गया और संबंधित बैंक से समन्वय स्थापित कर रकम को आरोपी के खाते में होल्ड कराया गया। बाद में न्यायालय से आवश्यक आदेश प्राप्त कर पूरी 29,272 रुपये की राशि पीड़ित के खाते में वापस करा दी गई।
दूसरे मामले में क्षेत्र के सकरा इटई आदम निवासी सुनील कुमार वर्मा साइबर ठगी का शिकार हुए। उन्होंने यूट्यूब चैनल के सब्सक्राइबर बढ़ाने की ऑनलाइन सेवा के नाम पर 10,515 रुपये भेजे थे। कुछ समय बाद उन्हें अहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। उन्होंने भी नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि इस धनराशि को ट्रेस कर बैंक के माध्यम से होल्ड कराया। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर 9,998 रुपये की राशि पीड़ित के खाते में वापस कराई गई है।
एसपी विकास कुमार का कहना है कि साइबर अपराधों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर शिकायत मिलने पर धनराशि को फ्रीज या होल्ड कराकर वापस कराए जाने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, सीवीवी, यूपीआई पिन या बैंकिंग जानकारी साझा न करें। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।