पेहरबाजार (बलरामपुर)। गांव में रहकर भी खिलाड़ियों की आंखों में पदक जीतने की ख्वाहिश है। कोई पिता के सपनों को साकार करने के लिए रात-दिन एक कर रहा है तो कोई देश का नाम रोशन करने के लिए। मंगलवार को अमर उजाला के जुनून खेल का कार्यक्रम में प्रतिभाग करने आए खिलाड़ियों से बात की गई तो उम्मीदों संग विश्वास का संगम दिखा।
अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने का है सपना
मध्यावकाश में मुझे दौड़ता देख खेल प्रशिक्षक मोहम्मद सुहेल ने मुझे बुलाकर नियमित अभ्यास कराना शुरू कर दिया। प्रतिदिन कॉलेज के बाद शाम को चार से छह बजे तक दौड़ का अभ्यास करती हूं। अब तक जनपदीय व मंडल स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता के पांच किमी. दौड़ मुकाबले में स्वर्ण पदक जीत चुकी हूं। मेरा सपना अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनकर भारत देश के लिए पदक जीतना है। - मधू वर्मा, 100 मीटर (बालिका वर्ग) दौड़ में प्रथम
प्रशिक्षक की प्रेरणा ने बनाया धावक
आठवीं की पढ़ाई करने के साथ मैं दो साल से एथलेटिक्स की तैयारी कर रहीं हूं। अब तक जिला व मंडल स्तरीय प्रतियोगिताओं में दौड़ व लंबी कूद में कई पुरस्कार मिल चुके हैं। मुझे खिलाड़ी बनने की प्रेरणा कॉलेज के खेल प्रशिक्षक से मिली है। उन्होंने माता-पिता को खेल का महत्व समझाकर मुझे घर से दौड़ने की अनुमति दिलाई है। -दिपस्वी, 100 मीटर (बालिका वर्ग) दौड़ में द्वितीय
देश को गोल्ड मेडल दिलाने की चाह
11वीं की पढ़ाई के साथ प्रतिदिन शाम को दो से तीन घंटे एजी हाशमी इंटर कॉलेेज के मैदान पर नियमित दौड़ लगाता हूं। इसमें आधे घंटे स्टेप रनिंग भी शामिल है। मेरा सपना है कि मैं भी ओलंपिक के मुकाबले में भारत की ओर से खेलते हुए अपने देश को मेडल दिलाऊं। -सचिन यादव, 100 मीटर (बालक वर्ग) दौड़ में प्रथम
ऐसे आयोजनों से बढ़ता है हौसला
पढ़ाई व खेती का काम करने के बीच दौड़ की तैयारी के लिए अक्सर समय नहीं मिल पाता है, जिसके कारण प्रदर्शन प्रभावित हो जाता है। ऐसे आयोजनों से प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है। साथ ही हौसला भी बढ़ता है। मैं देश के लिए पदक जीतकर अपने गांव व जिले का नाम रोशन करना चाहता हूं। -अजमल , 100 मीटर (बालक वर्ग) दौड़ में द्वितीय
गांव की लड़कियां किसी से पीछे नहीं
गांव की लड़कियों को अक्सर खेलकूद के क्षेत्र में पीछे समझा जाता है। लोगों की इस सोच को बदलने के लिए मैं एथलेटिक्स की तैयारी कर रहीं हूं। इसमें हमारे खेल प्रशिक्षकों का विशेष योगदान है। मैं साबित करना चाहती हूं कि गांव की लड़कियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। - शांति, विजेता लंबी कूद बालिका वर्ग
सेना में जाकर देश को मेडल दिलाने का सपना
मेरा सपना सेना में चयनित होकर देश की सेवा करना है। इसके लिए मैं एक साल से तैयारी कर रहा हूं। मेरा सपना है कि सैनिक बनकर में सीमा पर देश की रक्षा करूं और सेना की ओर से रनिंग, लंबी कूद, ऊंची कूद समेत अन्य खेलों में प्रतिभाग कर अपने देश व सेना को पदक भी दिलाऊं। - शक्ति वर्मा, प्रथम स्थान लंबी कूद बालक वर्ग
शिक्षक ने समझाया खेल का महत्व
पढ़ाई के साथ खेल के क्षेत्र में भी बेहतर प्रदर्शन कर अपना कॅरियर बनाया जाता है। यह सीख हमारे शिक्षक मेवालाल ने दी। उन्हीं से प्रेरित होकर मैं एथलेटिक्स की तैयारी कर रहा हूं। - सलमान, द्वितीय स्थान लंबी कूद बालक वर्ग
खिलाड़ी बन साकार करूंगी पिता का सपना
मेरेे पिता संतराम प्रजापति खेती-किसानी करते हैं। उनका सपना है कि बेटी खिलाड़ी बनकर परिवार का नाम रोशन करे। उनके इसी सपने को साकार करने के लिए मैं एथलेटिक्स की तैयारी कर रहीं हूं। - लक्ष्मी प्रजापति, कप्तान रस्साकशी विजेता टीम