बलरामपुर। संयुक्त जिला चिकित्सालय सभागार में अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से शुक्रवार को संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मौजूद चिकित्सक, चिकित्साकर्मी व रक्तदाताओं ने खून की आवश्यकता एवं महत्व पर चर्चा करते हुए लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया।
मुख्य अतिथि पंडित अटल बिहारी वाजपेयी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार चतुर्वेदी ने रक्तदान को लेकर लोगों में फैली नकारात्मक भ्रांतियों पर प्रकाश डालते हुए रक्तदाताओं को होने वाले लाभ की जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संयुक्त जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजकुमार वर्मा एवं पैथोलॉजिस्ट डॉ. आकांक्षा शुक्ला ने भी रक्तदान का महत्व बताते हुए लोगों को जागरूक किया।
कार्यक्रम में मौजूद रक्तदाताओं ने प्राचार्य से अपील किया कि शासन स्तर से ऐसी व्यवस्था कराई जाए कि यदि किसी रक्तदाता को अपने जिले से बाहर खून की आवश्यकता हो तो डोनर कार्ड पर उसे वहीं पर खून उपलब्ध हो जाए। प्राचार्य ने इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
संयुक्त जिला चिकित्सालय की गुणवत्ता प्रबंधक डॉ. रुचि पांडेय ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए लोगों को रक्तदान करने की शपथ दिलाई। पिछले दस वर्षों में 40 बार रक्तदान करने वाले समाजसेवी आलोक अग्रवाल ने कार्यक्रम में अनुभव साझा किया। कार्यक्रम में ब्लड बैंक के एलटी अशोक पांडेय, काउंसलर हिमांशु तिवारी, अभिषेक सिंह, विवेक कुमार शुक्ल सहित अन्य मौजूद रहे।
रक्तदान से बच सकती है जरूरतमंद की जान
रक्तदान एक महान मानवीय कार्य है, जो किसी जरूरतमंद की जान बचा सकता है। स्वस्थ व्यक्ति के लिए नियमित अंतराल पर रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित होता है। रक्तदान से शरीर में नया रक्त बनने की प्रक्रिया सक्रिय होती है। इससे स्वास्थ्य जांच का लाभ भी मिलता है। हर सक्षम व्यक्ति को स्वेच्छा से रक्तदान करना चाहिए।
- डॉ. राजेश कुमार चतुर्वेदी, प्राचार्य, पंडित अटल बिहारी वाजपेयी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय बलरामपुर
पूरी तरह सुरक्षित होता है रक्तदान
रक्तदान से जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी मिल सकती है, इसलिए यह मानवता और परोपकार की सच्ची मिसाल है। डॉक्टरों की देखरेख में किया गया रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित होता है। इससे शरीर में नए रक्त कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ावा मिलता है। इससे स्वास्थ्य पर कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
- डॉ. राज कुमार वर्मा, सीएमएस संयुक्त जिला चिकित्सालय
मधुमेह के मरीज भी कर सकते हैं रक्तदान
एक यूनिट रक्त कई मरीजों के उपचार में उपयोगी साबित हो सकता है। रक्तदान को लेकर लोगों में यह भ्रांति है कि उच्च रक्तचाप व मधुमेह के मरीज खून नहीं दे सकते, लेकिन यह बात सही नहीं है। 150-100 रक्तचाप वाले तथा ऐसे मधुमेह के मरीज जो इंसुलिन नहीं ले रहे हैं वह रक्तदान कर सकते हैं। इससे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने के बजाय लाभ मिलता है।
- डॉ. आकांक्षा शुक्ला, पैथोलॉजिस्ट, संयुक्त जिला चिकित्सालय
सामाजिक जिम्मेदारी का बढ़ता है भाव
मैं रक्तदान को जीवनदान के समान मानता हूं। रक्तदान करने से आत्मसंतोष और सामाजिक जिम्मेदारी का भाव बढ़ता है। जब 50 वर्ष की उम्र में पहली बार रक्तदान करते समय थोड़ी झिझक थी, लेकिन यह अनुभव इतना अच्छा रहा कि 60 वर्ष की आयु पूरी करने तक मैं 40 बार रक्तदान कर चुका हूं।
- आलोक अग्रवाल, समाजसेवी
सहयोग की भावना को मजबूत करता है रक्तदान
रक्तदान सामाजिक एकता और सहयोग की भावना को मजबूत करता है। खून की आवश्यकता होने पर पीड़ित व्यक्ति के साथ उसके परिजनों की मनोदशा को एक परेशान व्यक्ति ही सही ढंग से समझ सकता है। सभी स्वस्थ नागरिकों को रक्तदान अवश्य करना चाहिए।
- विवेक कुमार शुक्ल, शिक्षक व समाजसेवी