बलरामपुर। प्रदेश के करीब 1976 शिक्षकों की मौत हो चुकी है। संक्रमित शिक्षकों से ही उनके करीब दो हजार परिजनों की भी असमय मृत्यु होने से छह हजार परिवारों में मातम छाया हुआ है। दूसरी तरफ अनुग्रह धनराशि 30 लाख न देनी पड़े इसके लिये सरकार के प्रतिनिधि एवं उच्चाधिकारी संवेदनहीन तरीके से मात्र तीन शिक्षकों की मौत की बात कहकर घिनौना मजाक बना रहे हैं।
चुनाव आयोग, पंचायती राज एवं बेसिक शिक्षा विभाग की इस दूषित मानसिकता से आहत यूटा में आक्रोश है। चुनाव ड्यूटी के दौरान जितने भी शिक्षकों की मौत हुई है उन्हें अनुग्रह राशि दी जाए।
यह बातें गुरुवार को यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन(यूटा) की तरफ से आयोजित वर्चुअल मीटिंग को संबोधित करते हुए यूटा के प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौर ने कही। उन्होंने कहा कि चुनाव संबंधी ड्यूटी में प्रत्येक कार्मिक शारीरिक रूप से स्वस्थ स्थिति में गया था और लौटने के बाद से बीमार हुआ।
एक सप्ताह के भीतर ही इलाज के माध्यम मौत हो गई। सरकार के प्रतिनिधि एवं शासन के अधिकारी नैतिकता अपनाएं और अनुग्रह राशि देने के लिए तय किए गए मानकों में संशोधन करें।
वर्चुअल बैठक में निर्णय लिया गया कि विभाग 69 हजार भर्ती के तहत नवनियुक्त शिक्षकों को माध्यमिक की तर्ज पर दो सत्यापन के बाद शपथपत्र के आधार पर वेतन देने के संबंध में निर्देश जारी नहीं करता है तो यूटा सोशल मीडिया के माध्यम से निंदा अभियान चलाएगा।
बैठक में प्रदेश कोषाध्यक्ष वीपी बघेल, संगठनमंत्री यादवेन्द्र शर्मा, जिलाध्यक्ष बलरामपुर देवकुमार मिश्र, जिला महामंत्री अशोक सिंह व जिला कोषाध्यक्ष पीयूष कुमार शर्मा ने अपने विचार व्यक्त किए।
बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि मृतक शिक्षकों के साथ इंसाफ नहीं हुआ तो यूटा सड़क पर उतरकर संघर्ष करेगी। बैठक के बाद सभी पदाधिकारियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत शिक्षकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।