बलरामपुर। जिन खेल मैदानों से खिलाड़ियों के सपनों को उड़ान मिलनी चाहिए थी, वहां आज बसों के पहिए दौड़ रहे हैं। जिले में कहीं खेल मैदान अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए हैं तो कहीं उन पर निर्माण को लेकर विवाद है। माध्यमिक विद्यालयों के खेल मैदानों की यह स्थिति खेल प्रतिभाओं के भविष्य पर सवाल खड़े कर रही है। नियमित अभ्यास के लिए पर्याप्त जगह न मिलने से छात्र-छात्राओं की तैयारी प्रभावित हो रही है और खेलों में आगे बढ़ने की उनकी उम्मीदें सिमटती जा रही हैं।
वर्षों से स्कूलों में खेल सुविधाओं के विस्तार के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई विद्यालय अपने सबसे अहम संसाधन, खेल मैदान, को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि अभ्यास के लिए समुचित मैदान ही नहीं होगा तो बड़े मंच तक पहुंचने का सपना कैसे साकार होगा। उनका कहना है कि जिले में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन संसाधनों के अभाव में उनका मनोबल टूट रहा है।
उत्तर प्रदेश ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष एवं देवीपाटन मंडल प्रभारी राम बहादुर कहते हैं कि खेल मैदान केवल खेलने की जगह नहीं होते, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व, टीम भावना और स्वस्थ जीवनशैली की पहली पाठशाला भी होते हैं। यदि इन मैदानों पर कब्जा होता रहा तो जिले की खेल संस्कृति भी कमजोर पड़ जाएगी।
बस अड्डा बना एएमपीपी इंटर कॉलेज का खेल मैदान
नगर स्थित एएमपीपी इंटर कॉलेज का खेल मैदान कई वर्षों से अतिक्रमण की मार झेल रहा है। यहां अस्थायी बस अड्डा संचालित होने से मैदान के चारों ओर निजी बसों का जमावड़ा लगा रहता है। जिस मैदान पर क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी और एथलेटिक्स जैसी प्रतियोगिताएं होनी चाहिए थीं, वहां दिनभर बसों का आवागमन होता है।
बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है। बसों की आवाजाही से मैदान कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो जाता है, जिससे खिलाड़ी नियमित अभ्यास नहीं कर पाते। क्रिकेट खिलाड़ी रजत और अनमोल बताते हैं कि दो वर्ष पहले तक मैदान खेल गतिविधियों के लिए उपलब्ध था, लेकिन अब बसों के कब्जे के कारण अभ्यास करना मुश्किल हो गया है।
खेल प्रशिक्षक मदनलाल का कहना है कि राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के चलते निजी बसें मैदान में खड़ी कराई जा रही हैं। यदि मैदान खाली करा दिया जाए तो यहां फिर से नियमित खेल गतिविधियां शुरू कराई जा सकती हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक मृदुला आनंद ने बताया कि मैदान खाली कराने के लिए सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (रोडवेज) और सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी को पत्र भेजा गया है। इस संबंध में जिलाधिकारी से भी वार्ता की गई है।
गोशाला विवाद में उलझा ढाई एकड़ का खेल मैदान
पचपेड़वा क्षेत्र के फजल-ए-रहमानिया इंटर कॉलेज का करीब ढाई एकड़ खेल मैदान भी विवादों में घिरा है। यहां गोशाला निर्माण के प्रस्ताव को लेकर प्रशासन और विद्यालय प्रबंधन आमने-सामने हैं।
कॉलेज के प्रधानाचार्य मोहम्मद नफीस खान ने बताया कि यह भूमि चार दशक से अधिक समय से विद्यालय के नाम दर्ज है और खेल गतिविधियों के लिए उपयोग होती रही है। वहीं जिला प्रशासन इसे ग्राम सभा की भूमि बताते हुए गोशाला निर्माण की योजना पर आगे बढ़ रहा है।
विद्यालय प्रबंधन और छात्र पहले भी इस प्रस्ताव का विरोध कर चुके हैं। उनका कहना है कि यदि मैदान का स्वरूप बदलता है तो करीब 1500 विद्यार्थियों की खेल गतिविधियां और प्रशिक्षण सीधे प्रभावित होंगे।
फोटो-16-बलरामपुर के बड़ा परेड ग्राउंड की पहले की स्थिति ।-संवाद