बलरामपुर। नगर धुसाह निवासी सेवानिवृत शिक्षक इंद्र प्रकाश त्रिपाठी राम मंदिर आंदोलन मैं सक्रिय भूमिका निभाई थी। आंदोलन के दौरान उनकी गिरफ्तारी नवंबर 1992 में में भिनगा श्रावस्ती में हुई थी। इस दौरान तीन विधायकों और 158 रामभक्तों के साथ वह 18 दिनों तक अस्थाई जेल में बंद रहे। इस दौरान जेल में रोज सुबह, दोपहर और शाम जयश्रीराम के नारों की गूंज रहती थी।
कारसेवा से जुड़े संस्मरण सुनाते समय भावुक हो उठे इंद्र प्रकाश बताते हैं कि अब जब राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है तो गर्व होता है कि राम के किसी काम आया। इसी लिए 22 जनवरी की तारीख उनके लिए किसी उत्सव या पर्व से काम नहीं है। पूर्व सांसद एवं श्रावस्ती जिला पंचायत अध्यक्ष दद्दन मिश्र ने उन्हें सम्मानित कर उनके जज्बे को नमन किया है।
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े धूसाह निवासी इंद्र प्रकाश खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं जो राम मंदिर में रामलाल की प्राण प्रतिष्ठा को देख सकेंगे। बताया कि नवंबर 1992 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से उनकी ड्यूटी श्रावस्ती जिले के भिनगा नगर में लगाई गई थी। भिनगा के तत्कालीन विधायक राजा चंद्रमणि कांत सिंह की अगुवाई में राम भक्तों का एक जत्था राजर्षि ठाकुर भिनगा से अयोध्या के लिए रवाना हो रहा था।
कार सेवा के लिए अयोध्या रवाना हुए जत्थे में मौजूद 158 लोगों को पुलिस प्रशासन ने रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया। सभी गिरफ्तार लोगों को बहराइच के किसान पीजी कॉलेज में बने अस्थाई जेल में ले जाया गया। बताया कि जत्थे में शामिल भिनगा विधायक राजा चंद्रमणि कांत सिंह के साथ इकौना विधायक विष्णु दयाल व कैसरगंज के विधायक रहे मयंकर सिंह ने भी अपनी गिरफ्तारी दी थी। रिहा होने के बाद जब घर पहुंचे तो पता चला कि ढांचा ढहा दिया गया। यह खबर सुनकर सभी राम भक्त उत्साहित हो गए। पूरा इलाका जयश्री राम के नारे से गूंज उठा।