बलरामपुर। कुपोषण को दूर कराने वाला बाल विकास विभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के कई केंद्रों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं की भारी कमी है। वहीं शहरी इलाकों में किराए के भवन में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं।
जिले के सभी 10 बाल विकास परियोजनाओं में 1882 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इसमें 757 आंगनबाड़ी केंद्रों के पास ही अपने भवन हैं। 1035 प्राथमिक विद्यालयों व 90 कम्युनिटी सेंटरों पर संचालित किए जा रहे हैं। सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर तीन लाख 35 हजार 218 लाभार्थियों का पंजीकरण है। एक करोड़ 72 लाख रुपये से 200 नए आंगनबाड़ी केद्रों का निर्माण कराया जा रहा है। कार्यदाई संस्था ने अभी तक नए भवन को हैंडओवर नहीं कराया है, जिससे विभाग को लाभ नहीं मिल पा रहा है। (संवाद)
बाल विकास परियोजनाओं में नहीं हैं सीडीपीओ
जिले के10 बाल विकास परियोजनाओं का काम सिर्फ सात सीडीपीओ से लिया जा रहा है। तीन बाल विकास परियोजनाओं में सीडीपीओ की तैनाती ही नहीं है। 75 मुख्य सेविकाओं की जरूरत हैं, जिसमें सिर्फ 28 की तैनाती है। 47 मुख्य सेविकाओं की कमी है। एक प्रशासनिक अधिकारी की तैनाती होनी चाहिए, जो खाली है। सात प्रधान सहायक की जगह सिर्फ दो, 12 कनिष्ठ सहायक की जगह 11 एवं 11 चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की जगह आठ की तैनाती है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं की कमी
-केंद्रों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं की कमी से पंजीकृत लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ दिलाने का मकसद पूरा नहीं हो पा रहा है। 1712 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की जगह 1351, 170 मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की जगह 33 व 1712 सहायिकाओं की जगह सिर्फ 381 की ही तैनाती है। कमी के चलते आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन में बाधा उत्पन्न हो रही है।
भेजा गया प्रस्ताव
आंगनबाड़ी केंद्रों के संसाधनों को बढ़ाने और कर्मचारियों की तैनाती के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।
निहारिका विश्वकर्मा, डीपीओ