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आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति समूची प्रकृति में विद्यमान

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बलरामपुर। नेशनल इंट्रीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) की तरफ से बीते दिन नगर के एक होटल में आयुर्वेद के महत्व पर गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें आयुर्वेद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसका उपयोग करने की बात कही गई।
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गोष्ठी व आयुर्वेद समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि सदर विधायक पल्टूराम ने दीप जलाकर किया। डॉ. सीमा पांडेय व डॉ. आशीष कुमार सिंह ने वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि नीमा एसोसिएशन आयुष चिकित्सकों का राष्ट्रीय संगठन है, जिससे तीन लाख से अधिक आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा पद्धति के चिकित्सक जुड़े हैं। भारत सरकार परंपरागत आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास कर रही है। हमारा प्रयास होगा कि ‘हर घर आयुर्वेद, हर दिन आयुर्वेद’ को लोगों तक पहुंचाएं। कोरोना जैसी बीमारी में भी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति द्वारा लोगों को बचाया गया है।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. धर्म दास गुप्ता ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति समूची प्रकृति में विद्यमान है। हमें अपनी जड़ी बूटियों व औषधियों का भरपूर उपयोग करके आयुर्वेद द्वारा स्वास्थ्य की रक्षा एवं रोगी के रोग का निवारण करना चाहिए। गोष्ठी को डॉ. प्रांजल त्रिपाठी, डॉ. आशीष कुमार सिंह, डॉ. जुबैर अहमद व डॉ. केके राना ने भी संबोधित किया। इस दौरान आईसीएसई बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में देश में प्रथम स्थान पाने वाले जिले के छात्र पुष्कर त्रिपाठी को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. आशीष सिंह, डॉ. एनके पांडेय, डॉ. विजय पांडेय, डॉ. प्रदीप, डॉ. फहमीदा खां, डॉ. श्रुति तिवारी मौजूद रहीं।
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