गैड़ास बुजुर्ग/बलरामपुर। स्थानीय ब्लॉक के सेखुइया गांव पिछले पांच वर्ष से राप्ती नदी के कटान का कहर झेल रहा है। गांव की सरहद को राप्ती नदी छू रही है। बाढ़ के दौरान ग्रामीणों को नदी की ऊंची लहरें डराती हैं। कटान में गांव के 23 किसानों की 118 बीघे जमीन समाहित हो चुकी है। यदि बरसात से पहले कटानरोधी कार्य नहीं कराया गया तो सेखुइया गांव नदी में विलीन हो जाएगा।
जिले की तीनों तहसीलों के 75 से अधिक गांव हर वर्ष राप्ती व बूढ़ी राप्ती नदी के साथ 17 पहाड़ी नालों की बाढ़ का कहर झेलते हैं। बाढ़ व कटान का कहर सबसे अधिक उतरौला तहसील के लोगों को झेलना पड़ता है। गैड़ास बुजुर्ग ब्लॉक का सेखुइया गांव राप्ती नदी के मुहाने पर पहुंच गया है। राप्ती नदी कटान करके गांव की सरहद तक पहुंच गई है। यह गांव बाढ़ में हर वर्ष घिर जाता है। गांव के लोगों का घरों से निकलना मुश्किल होता है। बाढ़ का पानी भरने से खरीफ की फसल धान, अरहर व उड़द की पैदावार नहीं हो पाती है। ग्रामीणों को रबी की फसल गेहूं, मसूर, सरसों व मटर आदि पर निर्भर रहना पड़ता है। राप्ती नदी की कटान में अब तक रामजी की 10 बीघे, अजीजुल्लाह की 10 बीघे, जाकिर हुसैन की पांच बीघे, अब्दुल्लाह की 15 बीघे, मानिक की पांच बीघे, हरिराम की 10 बीघे, राम सेवक की 10 बीघे, तौकीर हुसैन की 10 बीघे व राम भजन की पांच बीघे सहित 23 किसानों की 118 बीघे जमीन समाहित हो चुकी है। (संवाद)
कई बार दिया गया प्रार्थनापत्र
ग्रामीण बताते हैं कि सेखुइया गांव के पास राप्ती नदी के किनारे कटानरोधी कार्य कराने के लिए शासन-प्रशासन से कई बार मांग की गई, लेकिन अभी तक काम शुरु नहीं हो सका है। यदि बरसात से पहले कार्य नहीं कराया गया तो गांव के अस्तित्व पर खतरा मंडराएगा।
प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश
गैड़ास बुजुर्ग ब्लॉक के सेखुइया गांव के पास राप्ती नदी के किनारे कटानरोधी कार्य कराने के लिए ग्रामीणों ने प्रार्थनापत्र दिया है। बाढ़ खंड के इंजीनियरों से प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। शासन से बजट मिलने के बाद बाढ़ खंड के माध्यम से कटानरोधी कार्य कराया जाएगा। -राजेंद्र बहादुर, एसडीएम उतरौला