बलरामपुर। आजमगढ़ के एक स्कूल में छात्रा की खुदकुशी की घटना के बाद प्रधानाचार्य व शिक्षक की गिरफ्तारी के विरोध जिले के निजी विद्यालय मंगलवार को बंद रहे। इन विद्यालयों के प्रबंधक व प्रधानाचार्यों ने कलेक्ट्रेट में विरोध प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को सौंपकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए गाइडलाइन बनाए जाने की मांग की।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए यूपी सेल्फ फाइनेंस मैनेजर एंड प्रिंसिपल वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एमपी तिवारी ने कहा कि आजमगढ़ की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस घटना में प्रधानाचार्य व शिक्षक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। शिक्षकों का काम है अनुशासन बनाए रखना। ऐसी कार्रवाई होने से शिक्षकों का मनोबल घटेगा। अभिभावक जरा सी भी बात होने पर केस दर्ज कराने की धमकी देंगे।
एसोसिएशन के संरक्षक डॉ. अविनाश पांडेय व सचिव डॉ. पम्मी पांडेय ने कहा कि बिना अनुशासन के शिक्षा देना संभव नहीं है। बच्चों को अनुशासन में रखकर उनका भविष्य संवारा जा सकता है। बात-बात पर शिक्षकों पर कार्रवाई होने लगेगी तो बच्चों का मनोबल बढ़ेगा और उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होगी।
उत्तर प्रदेश वित्तविहीन विद्यालय प्रबंधक संघ के संरक्षक राज कुमार जायसवाल, सेंट जार्ज कान्वेंट स्कूल के प्रबंधक जीडी पांडेय व बाल भारती इंटर कॉॅलेज के प्रधानाचार्य रमेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि घटना की निष्पक्षता से जांच कराई जाए। जांच में जो भी दोषी पाया जाए उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। अभिभावक व बच्चों की गलती को सीधे प्रबंधक, प्रधानाचार्य व शिक्षकों पर थोप देना सही नहीं है।
इससे पहले प्रबंधक, प्रधानाचार्य व शिक्षकों ने स्कूल बंद करके विद्यालय में भी प्रदर्शन किया। हाथ में काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। इसके बाद नगर में मार्च निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां पर प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन डीएम के प्रतिनिधि को सौंपा। इस अवसर पर विनोद सिंह कलहंस, वीर गौरव सिंह, रमाकांत वर्मा, रीता चौधरी, असलम शेर खान व अंसार अहमद खान सहित तमाम विद्यालयों के प्रबंधक, प्रधानाचार्य व शिक्षक मौजूद रहे।