बलरामपुर। श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव के बेटे साकेत मिश्रा की करारी हार ने जिले में भाजपा संगठन की खामियों को उजागर कर दिया है। संगठन के प्रति कार्यकर्ताओं व आम लोगों के असंतोष ने ही देशभर में मिली भाजपा की जीत का जायजा यहां पर फीका कर दिया। माना जा रहा है कि देर-सवेर इसकी गाज संगठन से जुड़े लोगों पर गिर सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि चुनाव से पहले ही संगठन के क्रियाकलापों को लेकर शिकायतें ऊपर तक पहुंच चुकी हैं।
श्रावस्ती संसदीय सीट से साकेत की हार ने भाजपा को गहरा झटका दिया है। देशभर में श्रीराम मंदिर को लेकर जो उत्साह है उसी को आधार मानते हुए मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष के बेटे को मैदान में उतारा था। हिंदुत्व को आधार मानकर ब्राह्मण चेहरे को प्रत्याशी बनाया था। पार्टी का यह दांव कारगर भी होता दिखा क्योंकि सजातीय मतों की सार्वजनिक एकजुटता देखने को मिली। हालांकि भाजपा के स्थानीय संगठन की खामियों ने पार्टी नेतृत्व की उम्मीदों पर सारे जोड़-घटाव को तार-तार कर रख दिया। ऐसा इसलिए क्योंकि संगठन व कार्यकर्ता व आम जनता के बीच सामंजस्य का अभाव देखने को मिला। इतना ही नहीं इससे पहले हुए नगर निकायों के चुनाव व विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली जीत का भी जनप्रतिनिधि कोई खास असर नहीं दिखा पाए। विकास के नाम पर जीतने के बावजूद प्रत्याशियों की बेरुखी व जनता की नाराजगी साफ दिखी। नतीजा यह हुआ कि बूथों पर तथा निचले स्तर पर जाकर काम करने की जो जरूरत थी वह संगठन की तरफ से नहीं हो पाई।
बूथों पर नहीं दिखा भाजपा पदाधिकारियों का दमखम
जिले की 2104 बूथों पर भाजपा ने अध्यक्षों को मजबूती के लिए लगाया गया था। मतदाता सूची के पन्ना प्रमुख तक लगाए थे, लगातार निगरानी के लिए जिला प्रभारी भी जमे रहे। इसके बाद भी बूथों पर पकड़ ढीली ही रही। पहला मौका रहा जब पांचों विधानसभाओं में भाजपा का प्रदर्शन काफी खराब रहा। सबसे महत्वपूर्ण बलरामपुर सदर में भी भाजपा को तगड़ा झटका लगा है। वहीं तुलसीपुर में भी पार्टी बेपटरी हो गई। इससे संगठन की कोशिशों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
चुनाव परिणाम की समीक्षा की जाएगी। विधानसभावार मतदान की स्थितियों की रिपोर्ट के आधार पर देखा जाएगा कि चूक कहां से हुई। जिम्मेदारी तय की जाएगी।
- प्रदीप सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा