परसपुर (गोंडा)। रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास के गुरु नरहरिदास के आश्रम में सोमवार को साधु संतों का जमावड़ा लगा रहा। 84 कोसी परिक्रमा के पड़ाव पर पसका के सूकर खेत में इन संतों ने अपनी धूनी रमाई। आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, बिहार, बंगाल, गुजराज व उत्तराखंड के आए परिक्रमार्थियों ने गुरु के दर्शन कर रामचरित मानस के सुंदरकांड का पाठ भी किया।
चित्रकूट से शुरू हुई 84 कोसी परिक्रमा के पड़ाव के दौरान भजन कीर्तन का आयोजन किया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने संत महंतों का आशीर्वाद लिया। परिक्रमा संचालक महंत गोविंद दास ने भगवान राम की जन्मस्थली व गोस्वामी तुलसीदास का जन्मस्थान के दर्शन करने को परम सौभाग्य माना। कहा कि यहां जन्म लेने वाले प्राणियों का जीवन स्वत: धन्य हो जाता है। दूरदराज से आए संतों ने अमर उजाला समाचार पत्र में चौरासी कोसी परिक्रमा यात्रा की विस्तृत कवरेज को देखकर समाचार पत्र की सराहना की। यात्रा में फतेहपुर खागा निवासी छह वर्षीय मैना ने सभी देशों की राजधानी, 45 का पहाड़ा, गीता का श्लोक व अंग्रेजी में भजन सुनाए।