बलरामपुर। चालक-परिचालकों से अवैध वसूली, बसों में डुप्लीकेट स्पेयर पार्ट्स लगाए जाने और उत्पीड़न के आरोप लगाकर रोडवेज कर्मियों ने आंदोलन शुरू कर दिया। शुक्रवार सुबह उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के स्थानीय डिपो में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। इस बीच करीब तीन घंटे तक बसों का संचालन पूरी तरह ठप रहा, जिससे यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी।
सुबह करीब आठ बजे कर्मचारियों ने एआरएम पर गंभीर आरोप लगाकर चक्का जाम कर दिया। रोडवेज कर्मचारी विपिन कुमार शुक्ला, दिनेश कुमार सिंह, अमरेश कुमार, संतोष कुमार, अशोक तिवारी, वीरेंद्र, विजय पटेल, पंकज सिंह व कुलदीप सिंह आदि ने आरोप लगाया कि एआरएम चालकों और परिचालकों का शोषण कर रहे हैं। उनका कहना था कि एआरएम प्रतिमाह दो से तीन हजार रुपये तक वसूली करते हैं। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि मना करने पर कार्रवाई की धमकी दी जाती है। उनका यह भी कहना था कि बसों में डाले जा रहे स्पेयर पार्ट्स की गुणवत्ता खराब है, जो जल्दी खराब हो जाते हैं और उसकी जिम्मेदारी भी चालक-परिचालकों पर ही डाल दी जाती है।
इसी तनाव के बीच एक परिचालक विपिन कुमार शुक्ला की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिससे कर्मचारियों का आक्रोश और बढ़ गया। कर्मचारियों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। चक्का जाम होने से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। तीन घंटे बाद सुबह 11 बजे वार्ता एआरएम और कर्मचारियों के बीच बातचीत हुई, इसके बाद बसों का संचालन शुरू हो सका।
सामान रखने और धमकी देने के बाद हुआ विवाद
कर्मचारियों के अनुसार शुक्रवार को बलरामपुर-बहराइच-कैसरबाग मार्ग की एक कैसरबाग डिपो की बस शहर बस अड्डे पर खड़ी थी। आरोप है कि एक कार्गो फर्म के प्रतिनिधियों ने इमरजेंसी गेट के सामने भारी सामान रख दिया, जिससे यात्रियों को चढ़ने-उतरने में दिक्कत होने लगी। चालक और परिचालक ने सामान डिक्की में रखने को कहा तो अभद्रता की गई और नौकरी से हटवाने की धमकी दी गई। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने वीडियो साक्ष्य डिपो भेजा, लेकिन बाद में उन्हीं के खिलाफ शिकायत कर मार्ग परिवर्तन की कार्रवाई कर दी गई। संविदा चालक मुकेश कुमार मिश्रा और परिचालक विपिन कुमार शुक्ला ने बताया कि अनुबंध के अनुसार अधिकतम 150 किलोग्राम लगेज ही लिया जा सकता है। उन्होंने एकतरफा कार्रवाई निरस्त कर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
तीन घंटे भटके यात्री, करते रहे बसों का इंतजार
बसें बंद होने से यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ी। यात्री अशोक ने बताया कि उन्हें परिवार के साथ उतरौला जाना था, लेकिन डेढ़ घंटे तक बस नहीं मिली। वहीं गुड़िया ने कहा कि गोंडा जाने के लिए छोटे बच्चों के साथ इंतजार करना पड़ा और बाद में टैक्सी से जाना पड़ा। डिपो परिसर में कई अन्य यात्री भी टिकट लेकर खड़े रहे, पर बसें न चलने से निराश लौटे। हंगामे की सूचना पर कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी डिपो पहुंचे और कर्मचारियों से वार्ता कर उनकी समस्याएं सुनीं। कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष अनुज सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने एआरएम से बात की।
कार्रवाई से नाराज थे कर्मचारी
मुख्यालय के आदेश पर कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इसी को लेकर कर्मचारी नाराज थे। वार्ता के बाद मामला खत्म करा दिया गया है। तीन घंटे बाद बसों का संचालन शुरू हो गया।
गोपीनाथ दीक्षित, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक