बलरामपुर। श्रवास्ती संसदीय चुनाव में पूर्व सांसद रिजवान जहीर की तराई की सियासत में बड़ा दबदबा है। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा से टिकट न मिलने पर बेटी जेबा को तुलसीपुर विधानसभा से निर्दलीय ही मैदान में उतार दिया था। यह अलग बात है कि चुनाव में जीत का सेहरा भाजपा प्रत्याशी कैलाश नाथ शुक्ल के सिर बंधा था। लेकिन
सियासत की तस्वीर कुछ इस तरह बनी कि जेबा ने सपा प्रत्याशी पूर्व विधायक मशहूद खां को तीसरे नंबर पर धकेल कर दूसरा स्थान हासिल किया।
रिजवान जहीर वर्ष 1998 व 1999 में बलरामपुर संसदीय सीट से सपा से सांसद चुने गए थे। साल 1999 में हुए चुनाव में पूर्वांचल के कद्दावर नेता हरीशंकर तिवारी के बेटे भीष्म शंकर तिवारी उर्फ कुशल तिवारी भाजपा से बलरामपुर में चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में सपा से रिजवान जहीर ने कुशल तिवारी को पराजित कर अपना वर्चस्व दिखाया था। इससे पूर्व वर्ष 1998 के चुनाव में रिजवान ने भाजपा के कद्दावर नेता सत्यदेव सिंह को पराजित कर लोक सभा चुनाव जीता था।
इसके बाद रिजवान का वर्चस्व पूरे तराई में बढ़ गया था। तुलसीपुर विधान सभा क्षेत्र से रिजवान जहीर तीन बार विधायक भी रह चुके हैं। वर्ष 1989 के विधानसभा चुनाव में तुलसीपुर विस से निर्दलीय लड़े और जीते।
इसके बाद 1993 में सपा से विधायक बने। इसके बाद 1996 के चुनाव में रिजवान ने सपा को छोड़कर बसपा से चुनाव लड़ा व विधायक बने। वर्ष 2022 विधान सभा चुनाव में उनकी बेटी जेबा रिजवान ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में तुलसीपुर विधान सभा से चुनाव लड़ा था और 50 हजार से अधिक वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहीं थी।