बलरामपुर के सिसई घाट पर घटने लगा राप्ती नदी का जलस्तर।
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बलरामपुर। खतरे के निशान तक पहुंचकर राप्ती का जलस्तर शनिवार शाम से घटने लगा है। जलस्तर घटने से प्रशासन ने राहत की सांस ली है। राप्ती नदी का जलस्तर घटने से तटवर्ती इलाकों में कटान का खतरा बढ़ गया है। जिले के दो तहसीलों के 35 स्थानों पर राप्ती नदी के कटान का खतरा है। इन सभी स्थानों पर प्रशासन की तरफ से कटान रोकने के लिए उपाय तो किए गए लेकिन वह नाकाफी हैं।
बीते छह दिनों से हो रही भारी बारिश के चलते राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच गया था। शनिवार को सुबह 8 बजे तक राप्ती का जलस्तर 104.59 मीटर था जो खतरे के निशान से मात्र तीन सेंटीमीटर दूर था। दोपहर एक बजे जलस्तर घटकर 104.55 मीटर पहुंच गया।
दोपहर तीन बजे राप्ती का जलस्तर 104.52 मीटर रिकार्ड किया गया जो खतरे के निशान से 10 सेंटीमीटर नीचे था। बाढ़ घटने से प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली। तटवर्ती इलाकों में बसे ग्रामीणों का कहना है कि सदर व उतरौला तहसील के 35 स्थानों पर जलस्तर घटने के बाद कटान का खतरा बढ़ गया है।
प्रशासन की तरफ पिछले वर्ष कटान रोकने के लिए उपाय किए गए थे लेकिन अभी वह नाकाफी है। तटवर्ती इलाकों के बसे ग्रामीणों ने प्रशासन से कटान वाले क्षेत्रों में बेहतर प्रबंध किए जाने की मांग की है जिससे बेशकीमती जमीनों व घरों को बचाया जा सके।
एडीएम वित्त एवं राजस्व अरुण कुमार शुक्ल ने बताया कि राप्ती नदी का जलस्तर घटना शुरु हो गया है। तटवर्ती इलाकों में बाढ़ की संभावना खत्म हो गई है। कटान वाले क्षेत्रों में बाढ़ खंड के अधिकारियों को कटान रोकने के संबंध में उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं।