बलरामपुर के मधवापुर गांव के पास राप्ती नदी की कटान रोकने में लगे ग्रामीण। संवाद
बलरामपुर। राप्ती नदी का जलस्तर शनिवार को चेतावनी बिंदु से 10 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। नेपाल से 40 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से राप्ती के जलस्तर में बढ़ोत्तरी हुई है। दोपहर एक बजे के बाद से नदी का जलस्तर स्थिर है। फिलहाल तो कोई गांव प्रभावित नहीं हुआ है, लेकिन 20 से अधिक गांवों में कटान का खतरा बढ़ गया है।
सिसई घाट पर राप्ती नदी का चेतावनी बिंदु 103.620 मीटर है। शनिवार को दोपहर एक बजे नदी का जलस्तर 103.720 मीटर रिकाॅर्ड किया गया, जो चेतावनी बिंदु से 10 सेंटीमीटर ऊपर है। खतरे का निशान 104.620 मीटर है, फिलहाल राप्ती का जलस्तर इससे 90 सेंटीमीटर नीचे है। आपदा विशेषज्ञ अरुण सिंह ने बताया कि दोपहर एक बजे के बाद से राप्ती का जलस्तर स्थिर हो गया है। पहाड़ों पर बारिश होने के बाद नेपाल से राप्ती नदी के रास्ते राप्ती बैराज श्रावस्ती से 40 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। गंगाबक्स भागड़, टेंगनहिया, मधवाजोत, बेला व कोड़री सहित 20 गांवों में राप्ती से कटान की आशंका बढ़ गई है। एडीएम वित्त एवं राजस्व ज्योति राय ने बताया कि जिले में अभी बाढ़ की कोई भी संभावना नहीं है। फिर भी तटवर्ती गांवों के लेखपालों को अलर्ट कर दिया गया है।
गांव और विद्यालय पर मंडरा रहा खतरा
ललिया। क्षेत्र के ग्राम पंचायत चौकाकला के मजरे मधवापुर में राप्ती नदी से कटान तेज हो गई है। पहाड़ों पर हल्की सी बारिश होने पर राप्ती नदी के बढ़े जलस्तर का असर गांव में दिखने लगा है। कटान की चपेट में आने से कंपोजिट विद्यालय चौकाकला, पंचायत भवन और गांव के सैकड़ों घरों पर संकट मंडरा रहा है। कटान रोकने के लिए प्रशासन की ओर से बोरियों में मिट्टी और बालू भरकर प्रभावित हिस्से में डाला रहा है। हालांकि यह प्रयास नदी की तेज धारा के आगे नाकाफी साबित हो रहा है। ग्रामीण बड़कने, शिवकुमार, बृजमोहन, लक्ष्मी नारायण, बाबूराम और रवि यादव ने प्रशासन से स्थायी उपाय किए जाने की मांग की है।