बलरामपुर। देवीपाटन मंडल के काेयलरा गोपालपुर गांव में मां पाटेश्वरी देवी राज्य विश्वविद्यालय के स्थापना की राह आसान हो गई है। इसके लिए करीब 16.53 करोड़ रुपये से 20.3620 हेक्टेयर भूमि क्रय कर डीड बनाने की तैयारी पूरी की जा रही है। प्रशासन ने सहारनपुर में राज्य विश्वविद्यालय के क्रय की गई जमीन के मॉडल पर खरीद करने की स्वीकृति का प्रस्ताव विधि एवं न्याय विभाग को भेज दिया है।
विधि एवं न्याय विभाग से विक्रय विलेख (भूमि क्रय प्रपत्र) की स्वीकृति मिलने के बाद क्रय की जाने वाली भूमि की डीड उच्च शिक्षा विभाग को भेजी जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय की जमीन खरीद की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अनुसचिव यशवंत को नोडल अधिकारी तय किया है।
उनका कहना है कि जमीन की डीड उनके पास आएगी, उसी पर उन्हें हस्ताक्षर करना है। जमीनों के क्रय के लिए विधि एवं न्याय विभाग की स्वीकृति होनी है। सदर तहसील के उपनिबंधक सुशील कुमार कहते हैं कि जमीन क्रय की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। स्वीकृति के बाद डीड तैयार कर विभाग को भेजी जाएगी। इसी माह यह कार्य पूरे होने की उम्मीद है।
विश्वविद्यालय से जुड़ेंगे चारों जिलों के महाविद्यालय
मां पाटेश्वरी राज्य विश्वविद्यालय का निर्माण पूरा होने से चारों जिलों के महाविद्यालय संबद्ध होंगे। अभी तक गोंडा व बहराइच के 87 महाविद्यालय अयोध्या के डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से संबद्व हैं तो बलरामपुर व श्रावस्ती के 26 महाविद्यालय सिद्वार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु से संबद्व हैं। इससे मंडल के युवाओं को दिक्कत तो होती हैं। दोनों विश्वविद्यालयों पर भी कॉलेजों का ज्यादा दबाव है।
जानिए क्यों अपनाया गया खरीद का नया तरीका
विश्वविद्यालय के लिए भूमि खरीद में हर स्तर पर सावधानी बरती जा रही है। सहारनपुर में क्रय के लिए तैयार विलेख में विक्रेता की पूरी डिटेल दर्ज की गई है, जिसे उच्च शिक्षा विभाग ने भेजा है। इसमें विक्रेता के नाम पते के साथ ही उनके बैंक खाता नंबर, आधार कार्ड नंबर, पैन नंबर के साथ ही मोबाइल नंबर तक विलेख में ही दर्ज होंगे। ताकि अधिग्रहण के तहत दी जाने वाली राशि सही व्यक्ति को मिले और मोबाइल नंबर से सत्यापन हो सके। पूर्व में कई मामलों में भूमि क्रय के मामले में राशि किसी दूसरे व्यक्ति के खाते में जाने की शिकायतों को देखते हुए यह व्यवस्था बनी है।