अवैध धर्मांतरण और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के आरोपी जमालुद्दीन उर्फ छांगुर प्रकरण की जांच तेजी से आगे बढ़ी है। पुणे जमीन मामला अब केवल स्थानीय आर्थिक धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहा। जांच में सामने आया है कि छांगुर पुणे में जमीन सौदे के बहाने धर्मांतरण को बढ़ाने की तैयारी में था। एटीएस छांगुर के इस नेटवर्क की तह तक पहुंच चुकी है।
सूत्रों के अनुसार छांगुर ने पुणे के नजदीक 16 करोड़ की जमीन का सौदा करते समय केवल 85 लाख रुपये देकर एग्रीमेंट कराया था।वास्तविक रकम और दस्तावेज में हेराफेरी की गई। जांच में यह भी पता चला है कि उसने कोर्ट के बाबू राजेश उपाध्याय की पत्नी को हिस्सेदार बनाकर दस्तावेज में छेड़छाड़ करवाई, ताकि जमीन पर अवैध कब्जा किया जा सके। ऐसा करने का मकसद केवल संपत्ति हड़पना नहीं था, बल्कि स्थानीय संपर्क और वैध पहचान हासिल करना भी था।
अब तक की जांच में छांगुर के बैंक खातों और मोबाइल ट्रांजेक्शन में संदिग्ध लेन-देन के संकेत मिले हैं। यह रकम कथित रूप से धर्मांतरण को बढ़ावा देने के लिए इकट्ठा की जा रही थी।
मोहम्मद अहमद खान के बयान ने दी जांच को नई दिशा
छांगुर के अहम राजदार मोहम्मद अहमद खान से मिली जानकारी ने जांच को नई दिशा दी है। सूत्रों के अनुसार छांगुर ने जमीन सौदे को ‘सामाजिक प्रोजेक्ट’ बताकर कई लोगों को इससे जोड़ा। छांगुर का नेटवर्क धार्मिक गतिविधियों और आर्थिक लाभ दोनों के लिए सक्रिय था। एटीएस ने पुणे और लखनऊ में छांगुर के ठिकानों पर छापा भी मारा था। डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड जब्त किए थे। संदिग्ध लोगों की जानकारी भी एटीएस जुटा चुकी है। जांच में इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि मामला सिर्फ वित्तीय धोखाधड़ी नहीं, बल्कि धार्मिक नेटवर्क और संपत्ति हड़पने की योजना से भी जुड़ा है।