बलरामपुर। मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब सभी निजी चिकित्सालयों को अपने यहां होने वाले प्रसव की साप्ताहिक रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को अनिवार्य रूप से देनी होगी। इससे न सिर्फ प्रसव संबंधी आंकड़ों का नियमित संकलन संभव होगा, बल्कि जच्चा-बच्चा की देखभाल, टीकाकरण, पोषण और आपातकालीन सेवाओं की बेहतर निगरानी की जा सकेगी।
निजी अस्पतालों में आए दिन जच्चा-बच्चा के इलाज व देखभाल को लेकर शिकायतें आती रहती हैं। लापरवाही से इलाज के कारण कई अस्पतालों में जच्चा-बच्चा की जान तक जा चुकी है। आशा कमीशन के लालच में गर्भवती को सरकारी अस्पताल ले जाने के बजाय निजी अस्पतालों को प्राथमिकता देती हैं। हालत बिगड़ने पर निजी अस्पताल के चिकित्सक गर्भवती को रेफर कर देते हैं। नई व्यवस्था से अब प्रत्येक अस्पताल में होने वाले प्रसव की जानकारी जुटाई जा सकेगी। जटिल प्रसव की स्थिति में समय पर विशेषज्ञ सहायता प्रदान की जा सकेगी। इसके अलावा निजी और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के बीच समन्वय मजबूत होने से मातृ-शिशु मृत्यु दर को भी कम किया जा सकता है।
प्रसव बढ़ने पर संबंधित क्षेत्र की आशा पर होगी कार्रवाई
साप्ताहिक रिपोर्ट में जिस क्षेत्र के निजी अस्पतालों में प्रसव ज्यादा रहेगा, उस क्षेत्र की आशा की भूमिका संदिग्ध मानी जाएगी। जिला प्रशासन की तरफ से निजी अस्पताल की सीसीटीवी कैमरे में जांच की जाएगी। जांच में यदि आशा दिखाई पड़ती हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। संबंधित क्षेत्र के सरकारी अस्पताल में लक्ष्य के अनुसार संस्थागत प्रसव न होने पर आशा की संविदा भी समाप्त की जा सकती है।
संस्थागत प्रसव बढ़ाने में मिलेगी मदद
सुरक्षित मातृत्व की दिशा में यह एक सकारात्मक पहल है। इससे न सिर्फ संस्थागत प्रसव का ग्राफ बढ़ेगा, बल्कि मातृ-शिशु सेहत में सुधार भी आएगा।
- डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी, सीएमओ बलरामपुर