बलरामपुर। भारत-नेपाल दोहरी नागरिकता कांड की विवेचना अब केवल फर्जी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रह गई है। जांच अब उस पूरी प्रक्रिया तक पहुंच गई है, जिसके जरिये संदिग्ध लोगों को भारतीय पहचान दिलाई गई। विवेचना के दौरान पुलिस को ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ मामलों में एक स्थानीय नेता की पैरवी से मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की कोशिश की गई।
शुरुआती जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि कुछ लोगों ने उसी नेता के पते को अपना निवास दर्शाकर भारतीय दस्तावेज हासिल करने की प्रक्रिया शुरू की थी। अब पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की दस्तावेजी कड़ियां जोड़ने में जुट गई है। निर्वाचन विभाग से प्राप्त मतदाता पंजीकरण प्रपत्रों के साथ राजस्व, पंचायत, स्थानीय निकाय और अन्य विभागों के अभिलेखों का मिलान किया जा रहा है।
जांच टीम यह पता लगा रही है कि संबंधित व्यक्तियों ने आवेदन के समय किस पते को अपना स्थायी निवास बताया था, उस पते के समर्थन में कौन-कौन से दस्तावेज लगाए गए थे और उनका सत्यापन किस स्तर पर किया गया। यह भी खंगाला जा रहा है कि मतदाता पहचान पत्र बनने के बाद उसी आधार पर राशन कार्ड, निवास प्रमाणपत्र, आधार, परिवार रजिस्टर या अन्य सरकारी दस्तावेज तो जारी नहीं किए गए।
जांच एजेंसी दस्तावेजों की पूरी चेन तैयार कर रही है। विवेचना से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पुलिस फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय साक्ष्यों को मजबूत करने पर जोर दे रही है। बताया जा रहा है कि कई विभागों से मांगे गए अभिलेख अभी प्राप्त होने बाकी हैं। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर जांच का अगला चरण तय होगा। पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने कहा कि विभिन्न विभागों से अभिलेख और रिपोर्ट प्राप्त किए जा रहे हैं। सभी दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है।